58 साल पुराना कृष्ण, राधा और रुकमणि का एक गाना है जो कृष्ण भक्तों ही नहीं बल्कि जन्माष्टमी के मौके लिए भी एकदम परफेक्ट है. इस गाने की लेंथ भी बेहद कमाल है क्योंकि ये 9 मिनट 58 सेकंड का है. लेकिन इस महिमा को सुनकर किसी का भी मन भक्ति रस से परिपूर्ण हो सकता है. 1968 में रिलीज हुई फिल्म 'राजा और रंक' का गाना ‘ओ कन्हैया' आज भी कृष्ण भक्तों और पुराने गीतों के प्रेमियों के दिल में बसा हुआ है. करीब 9 मिनट 58 सेकंड लंबा यह गीत सत्यभामा, रुक्मिणी और राधा के भावों को एक साथ समेटता है. 58 साल बाद भी लोग इसे बार-बार चलाते हैं, खासकर जन्माष्टमी पर. वैसे भी 4 सितंबर को जन्माष्टमी का त्योहार पूरी धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है.
फिल्म और गाने की पृष्ठभूमि
'राजा और रंक' एल.वी. प्रसाद की प्रसाद प्रोडक्शंस की फिल्म थी. निर्देशन कोटय्या प्रत्यागात्मा का था. संजीव कुमार, कुमकुम, नाजिमा और निरूपा रॉय मुख्य भूमिका में थे. कहानी मार्क ट्वेन के 'द प्रिंस एंड द पॉपर' पर आधारित तेलुगु फिल्म राजु पेडा की रीमेक थी. इसी फिल्म में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और आनंद बख्शी की जोड़ी ने कई यादगार गाने दिए. उनमें सबसे लंबा और अलग अंदाज वाला था ‘ओ कन्हैया'. गाने की आवाजें लता मंगेशकर, मन्ना डे, कौमुदी मुंशी और विनोद शर्मा की हैं.
गीत में क्या है खास
ये गाना सिर्फ भजन नहीं, एक छोटी नाटकीय कथा है. आनंद बख्शी के बोल सरल हैं, लेकिन भाव गहरे हैं. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत पारंपरिक रागों और फिल्मी मेलोडी का सुंदर मेल है. लंबाई के बावजूद गाना उबाऊ नहीं लगता. जन्माष्टमी पर मंदिरों, घरों और यूट्यूब पर यह गाना खूब चलता है. कई संस्करणों में इसकी अवधि 9:39 से 10:15 मिनट तक बताई जाती है. लेकिन यूट्यूब पर ये 9 मिनट 58 सेकंड का ही है.
58 साल बीत गए, लेकिन ‘ओ कन्हैया' आज भी कृष्ण की लीला, राधा की विरह और रुक्मिणी-सत्यभामा के प्रेम की याद दिलाता है.
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