कुछ गाने ऐसे हैं, जिन्हें सुनते ही मन खुश हो जाता है और कुछ ऐसे हैं जो सीधे दिल को छू जाते हैं. श्रीदेवी की फिल्म 'सदमा' का एक गाना भी कुछ ऐसा ही है. इसे सुनकर लगता है जैसे कोई बहुत करीब से जिंदगी की बात कर रहा हो. इस गाने को रिलीज हुए 43 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी इसकी आवाज और बोल लोगों को उतने ही अच्छे लगते हैं. खास बात ये है कि ये गाना प्यार से ज्यादा जिंदगी के बारे में बात करता है और हर उम्र के लोगों को अपना सा लगता है.
43 साल पुराना गाना आज भी है पसंद
हम बात कर रहे हैं फिल्म 'सदमा' के गाने 'ऐ जिंदगी गले लगा ले' की. साल 1983 में आई इस फिल्म में श्रीदेवी और कमल हासन साथ नजर आए थे. इस खूबसूरत गाने को सुरेश वाडकर ने गाया था. इसके बोल गुलजार ने लिखे थे और म्यूजिक इलैयाराजा ने दिया था. गाने के बोल सुनते ही ऐसा लगता है जैसे कोई जिंदगी से कह रहा हो कि जो भी है, उसे खुलकर जी लो. यही बात इस गाने को बाकी गानों से थोड़ा अलग बनाती है. इसमें न कोई भारी-भरकम बात है और न ही कुछ ऐसा जिसे समझने के लिए ज्यादा सोचना पड़े.
गाना रिकॉर्ड करते समय घबरा गए थे सुरेश वाडकर
इस गाने से जुड़ी एक मजेदार बात भी है. सुरेश वाडकर ने बताया था कि जब वे इसकी रिकॉर्डिंग कर रहे थे, तब उन्हें काफी घबराहट हो रही थी. इसकी वजह भी खास थी. उस समय म्यूजिक की दुनिया के बड़े नाम इलैयाराजा स्टूडियो में मौजूद थे. सुरेश वाडकर उनके सामने गाना रिकॉर्ड कर रहे थे. उन्हें डर था कि कहीं उनसे कोई गलती न हो जाए. लेकिन उनकी आवाज में जो फीलिंग थी, उसने गाने को और भी खूबसूरत बना दिया.
'सदमा' को बाद में मिला खूब प्यार
जब 'सदमा' साल 1983 में रिलीज हुई थी, तब फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी कामयाबी नहीं मिली थी. लेकिन धीरे-धीरे लोगों को ये फिल्म पसंद आने लगी. आज इसे बॉलीवुड की खास फिल्मों में गिना जाता है. श्रीदेवी और कमल हासन की एक्टिंग के साथ फिल्म के गाने भी लोगों को पसंद आए. इनमें 'ऐ जिंदगी गले लगा ले' सबसे खास बन गया. आज भी इसे सुनते ही पुराने बॉलीवुड की याद आ जाती है.
जिंदगी को खुलकर जीने की बात करता है गाना
इस गाने की सबसे अच्छी बात यही है कि ये आज भी पुराना नहीं लगता. जिंदगी में जब सब कुछ सही चल रहा हो, तब भी ये गाना अच्छा लगता है और जब मन थोड़ा परेशान हो, तब भी इसके बोल दिल को सुकून देते हैं. शायद यही वजह है कि 43 साल बाद भी श्रीदेवी का ये गाना लोगों की प्लेलिस्ट में बना हुआ है. सुरेश वाडकर की आवाज और गुलजार के आसान लेकिन दिल छू लेने वाले बोलों ने इसे ऐसा गाना बना दिया, जिसे सुनने का मन बार-बार करता है.
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