आमिर खान के फिल्मी करियर में कई ऐसे गाने हैं, जिन्हें आज भी लोग पूरे उत्साह के साथ सुनते हैं. 1996 में आई फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी' भी अपनी कहानी के साथ-साथ शानदार संगीत के लिए याद की जाती है. फिल्म के लगभग सभी गाने लोकप्रिय हुए थे, लेकिन ‘परदेसी परदेसी' ने अलग ही पहचान बनाई. उदित नारायण और अलका याग्निक की आवाज में सजे इस गाने ने आमिर खान और करिश्मा कपूर की जोड़ी को खूब चर्चा दिलाई. खास बात यह है कि जिस गाने ने बाद में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की, उसे कभी फिल्म में शामिल करने से ही मना कर दिया गया था.
‘परदेसी परदेसी' को पहले नहीं मिली थी हरी झंडी
‘राजा हिंदुस्तानी' का निर्देशन धर्मेश दर्शन ने किया था और फिल्म में आमिर खान के साथ करिश्मा कपूर नजर आई थीं. फिल्म की कहानी और कलाकारों के अलावा इसका संगीत भी दर्शकों के बीच खूब पसंद किया गया. इसी एल्बम का सबसे चर्चित गाना ‘परदेसी परदेसी' था.
इस गाने में जुदाई और दर्द को बेहद खूबसूरती से पेश किया गया था. गाने की धुन, बोल और गायकी ने इसे ऐसा रूप दिया कि यह आज भी हिंदी सिनेमा के यादगार दर्द भरे गानों में गिना जाता है. हालांकि, शुरुआत में कहानी बिल्कुल अलग थी. गाने को लेकर मेकर्स के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी और इसे फिल्म में रखने पर ही सवाल खड़े हो गए थे.
एक शब्द और ट्यून को लेकर था मेकर्स को ऐतराज
गीतकार समीर अनजान ने एक इंटरव्यू में इस गाने से जुड़ा दिलचस्प किस्सा साझा किया था. उनके मुताबिक, गाने की ट्यून और खास तौर पर ‘परदेसी' शब्द के इस्तेमाल को लेकर प्रोड्यूसर सहज नहीं थे. उन्हें गाने का यह हिस्सा कुछ अलग और अटपटा लगा था. इसी वजह से गाने को रिजेक्ट करने की नौबत आ गई थी.
लेकिन समीर अनजान को पूरा भरोसा था कि गाने में दम है और दर्शक इसे पसंद करेंगे. दूसरी तरफ, संगीतकार नदीम-श्रवण भी अपने संगीत को लेकर आश्वस्त थे. इसी विश्वास के चलते गाने को दोबारा मौका मिला और इसकी रिकॉर्डिंग की गई.
हिट हुआ तो प्रोड्यूसर को देनी पड़ी डबल फीस
गाने को लेकर संगीतकार नदीम-श्रवण ने प्रोड्यूसर के सामने एक खास शर्त रखी थी. उन्होंने कहा था कि अगर गाना नहीं चला तो रिकॉर्डिंग का खर्च वे खुद उठाएंगे, लेकिन अगर यह हिट हो गया तो उन्हें दोगुनी फीस देनी होगी. आखिरकार गाना रिकॉर्ड हुआ और रिलीज के बाद देखते ही देखते छा गया.
‘परदेसी परदेसी' ने न सिर्फ चार्ट पर धूम मचाई, बल्कि आमिर-करिश्मा की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री को भी यादगार बना दिया. गाने में नजर आई बंजारा लड़की का किरदार भी दर्शकों के बीच खूब लोकप्रिय हुआ. समीर अनजान ने इंडिया टुडे के साथ बातचीत में बताया था कि गाना हिट होने के बाद प्रोड्यूसर को अपना वादा निभाना पड़ा और नदीम-श्रवण को डबल फीस देनी पड़ी. आज तीन दशक बाद भी यह गाना हिंदी सिनेमा के सदाबहार गानों में शामिल है.
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