अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, रवीना टंडन, परेश रावल, राजपाल यादव, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नाडिस और जैकी श्रॉफ की फिल्म वेलकम टू द जंगल सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है. इस फिल्म का बज लंबे समय से बना हुआ है. कुल मिलाकर वेलकम टू द जंगल में 32 कलाकार नजर आने वाले हैं. ऐसे में यह फिल्म काफी सुर्खियां बटोर रही हैं. वहीं वेलकम टू द जंगल की रिलीज से पहले फिल्म के एक्टर सुनील शेट्टी ने एनडीटीवी से खास बातचीत की. नीचें पढ़ें बातचीत के अंश:-
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सवाल: पहला सवाल तो यही है कि दर्शक हमेशा इंतजार करते रहते हैं कि आप दोनों की जोड़ी बड़े पर्दे पर कब आएगी? जब आप साथ काम करते हैं तो इस हिट जोड़ी की वापसी का कितना इंतजार रहता है?
सुनील शेट्टी: नहीं, ये हिट जोड़ी है और हिट फ्रैंचाइजी भी. फिरोज नाडियाडवाला के पास सारे फ्रैंचाइजी हैं, इसलिए कॉम्बिनेशन बहुत बढ़िया है. लोगों की उम्मीदें बहुत ऊंची होती हैं, इसलिए हमें भी अच्छा डिलीवर करना होता है.
मैं खुश हूं कि ये एक एंटरटेनिंग फिल्म है और बड़ी फ्रैंचाइजी है. लेकिन आज कुछ नहीं कह सकते, जब तक शुक्रवार नहीं आ जाता. फिल्म के बारे में अभी कुछ बोलना ठीक नहीं है. कल रात को थर्सडे को लास्ट शो के बाद पता चल जाएगा. अगर लोगों के चेहरे पर मुस्कान होगी तो हमारे चेहरे भी ऐसे ही रहेंगे. ओपनिंग की बात करें तो लोग 18, 20 या 25 करोड़ तक बोल रहे हैं. लेकिन ओपनिंग से ज्यादा जरूरी ऑडियंस रिव्यू है. अगर दर्शक कह दें कि फिल्म एंटरटेनिंग है, तो हम सेट हैं.
सवाल: लेकिन फिल्म को लेकर आपको कैसा बज लग रहा है? मुझे तो ट्रेलर बहुत पसंद आया. मैं आमतौर पर कम हंसता हूं, लेकिन ट्रेलर देखकर हंसा.
सुनील शेट्टी: नहीं नहीं, क्या है बच्चे और औरतें बहुत बोल रही हैं कि यार वो पिक्चर आ रही है, देखनी है, देखनी है, देखनी है. अक्षय, अनिल जी और नाना की वजह से ये फ्रैंचाइजी बहुत पावरफुल हो गई है. तो आई थिंक उसका एडवांटेज लेते हुए अहमद ने एक अच्छी, सिंसियर फिल्म बनाई है. ये एंटरटेनिंग है. मैं कहूंगा कि इसमें लॉजिक ढूंढने मत जाइए क्योंकि ये एक फेक फिल्म है. और एक्टर्स भी चुने हुए हैं, तो ऐसे एक्टर्स चुने हुए हैं क्योंकि फ्लॉप फिल्म बनाना था, तो एकदम गए-गुजरे एक्टर्स, बेवकूफों को लिया हुआ है. तो बेवकूफी तो बहुत होगी ही होगी. खास बात ये है कि फिल्म तो फ्लॉप फिल्म बन रही है, लेकिन इसमें विलेन रियल है. अब देखना यह है कि इस सिचुएशन से लोग कैसे निपटते हैं.
सवाल: अन्ना, आपने इंडस्ट्री में इतना लंबा समय बिताया है. क्या आपने कभी देखा है कि कोई प्रोड्यूसर जानबूझकर फ्लॉप होने के लिए फिल्म बनाए?
सुनील शेट्टी: नहीं, लेकिन क्या है, इसीलिए मैं फ्राइडे के लिए वेट करता हूं ना. कोशिश तो यही रहती है कि एक अच्छी फिल्म बनाएं. लेकिन ऑडियंस और एंड यूज़र अलग ही दिमाग है उनका. और आज सोशल मीडिया के ज़माने में तो और मुश्किल हो गया है. ऑडियंस ही है जो रिव्यूज देते हैं और फिल्म को चलाना ना चलाने वाली बात करते हैं. जैसे आप देखिए ना, इम्तियाज जी की फिल्म इतनी तारीफ हुई थी, लेकिन लेट स्टार्टर था. लेकिन कहीं ना कहीं ऑडियंस को लगा अच्छी फिल्म है, तो वो उसे सपोर्ट कर रहे हैं.
सवाल: आज इंडस्ट्री में क्या बदलाव आ रहे हैं? हर कोई डरा हुआ है कि पोस्ट धुरंधर क्या करें और क्या ना करें. क्या आपको भी अपने साथियों या प्रोड्यूसर्स में यह डर दिखता है?
सुनील शेट्टी: 100% दिखता है। स्पोर्ट्स बहुत बड़ा कॉम्पिटिशन है। क्रिकेट वर्ल्ड कप चल रहा है, फुटबॉल वर्ल्ड कप है, इंडिया-अफगानिस्तान और इंडिया-इंग्लैंड मैच आने वाले हैं।
स्पोर्ट्स के साथ बहुत सारे लोग जुड़ जाते हैं। टीम इंडिया के सामने कोई टिक नहीं सकता। इसके अलावा मजबूत ओटीटी कंटेंट, यूट्यूब और दूसरे वर्टिकल कंटेंट भी बहुत हैं। लोग चॉइस में खराब हो गए हैं। ये बायर्स मार्केट है। अच्छा लगा तो खरीदेंगे, वरना नहीं।
हमें अच्छा कंटेंट देना होगा। टियर-2 और टियर-3 शहर बहुत अहम हैं। बड़े शहरों को छोड़कर छोटे शहरों का बड़ा योगदान होता है। सिर्फ अर्बन सिनेमा से काम नहीं चलेगा। हमें पैन-इंडिया कंटेंट बनाना पड़ेगा।
सवाल: क्या आपको लगता है कि 70s-90s में जो सिनेमा बनता था, आज भी वही ट्रीटमेंट और कंटेंट काम कर रहा है?
सुनील शेट्टी: बिल्कुल, 100% आपने सही कहा.
सवाल: क्या अर्बनाइजेशन के चक्कर में हम मनोरंजन की अपनी जड़ों को पीछे छोड़ आए हैं?
सुनील शेट्टी: जी हां, बिल्कुल. फिरोज भाई डिज्नी वाली सोच रखते हैं, फैमिली एंटरटेनमेंट, फ्रैंचाइजी, अच्छा कैरेक्टराइजेशन. फिलहाल सब अच्छा लग रहा है. लेकिन कल शाम को पता चल जाएगा, डर तो है ही.
सवाल: ट्रेलर के दो दृश्यों पर बात करें. एक में आप कहते हैं कि “मैं फ्लॉप फिल्में भी देखता हूं” — क्या आप वाकई कमियां ढूंढने के लिए ऐसी फिल्में देखते थे?
दूसरा दृश्य गन चलाने और हेलीकॉप्टर पर लटकने के बाद आप कहते हैं “मुझसे नहीं होगा”. क्या ये बड़े स्टार्स के आपसी कॉम्पिटिशन पर कटाक्ष है?
सुनील शेट्टी: कॉम्पिटिशन से ज्यादा, अक्षय और मेरे बीच जो अकड़ होती है और आखिर में दोस्ती हो जाती है, वो हमेशा से रहा है. ये हिंदी फिल्मों का बेसिक फॉर्मूला है और हमारे लिए हमेशा काम करता है.
कोई भी 'वक्त हमारा है लीजिए', 'मोहरा' लीजिए, 'धड़कन' लीजिए, क्लैश हुआ ही हुआ है. और ऑडियंस को मज़ा आता है और ऑडियंस और उसी फार्मूला को डायरेक्टर ने इस्तेमाल किया है क्योंकि अक्षय और मेरी बिल्कुल नहीं बनती फिल्म में.
सवाल: ऑफ कैमरा बनती है?
सुनील शेट्टी: हां, ऑफ कैमरा बनती है. इसलिए ये जरूरी है कि लोग उस पल का मजा लें. सेट पर टेंशन भी बहुत होती है, लेकिन मस्ती भी चलती रहती है. फ्लॉप फिल्म में एक-दूसरे का खींचना, एक-दूसरे का टांग खींचना. मेरा कहना कि मुझे भी करना है जो वो कर रहा है. रियलाइज होता है कि यार हाइट से तो मुझे जमता ही नहीं है. ऑफ़कोर्स मस्ती तो चलती रहती है. अप्रीशिएट करते हैं. मैं एडमायर करता हूं जिस तरीके से अक्षय ने अपने करियर को हैंडल किया हुआ है, सब कुछ हैंडल किया हुआ है, फिटनेस को हैंडल किया हुआ है.
सवाल: मेरी रवीना से बात हुई, उन्होंने कहा कि सीन खत्म होने के बाद भी सेट पर आपकी मस्ती जारी रहती थी. क्या ये सच है?
सुनील शेट्टी: वो 100%. 32 एक्टर्स जब रहते हैं और एक से एक धुरंधर और मस्तीखोर, अरशद वारसी, लाफ रायट. यही वजह थी कि शूटिंग का मूड हमेशा अच्छा रहता था. वरना ऐसी इतनी बड़ी स्टारकास्ट की पिक्चर कभी कंप्लीट ही नहीं होती. लेकिन ये स्मूथली पूरी हुई और उसके अलावा आप देखोगे कि अप्रीशिएट बहुत सारे लोग होंगे. फरीदा जी, किरण कुमार, एक्स्ट्राऑर्डिनरी कैरेक्टर्स, विंदू दारा सिंह. तो सारे एक्टरों को क्रेडिट मिलेगा फॉर द वर्क दे हैव डन एंड फायदा भी होगा.
सवाल: आखिरी दो सवाल, बतौर एक्टर अब आप खुद को किस तरह के किरदारों या फिल्मों में देखना चाहते हैं?
सुनील शेट्टी: मुझे यूनिफॉर्म वाली फिल्में पसंद हैं, देशभक्ति की फिल्में, रियल स्टोरीज और असली इमोशंस वाली फिल्में.
जब हम फिक्शन बनाते हैं तो इमोशंस उतना नहीं चल पाता. लेकिन देश, यूनिफॉर्म, हीरोज और सच्ची घटनाओं से जुड़ी फिल्में हमेशा परफेक्ट होती हैं. जैसे ‘धुरंधर' या ‘बॉर्डर'क्योंकि वो मेन इन यूनिफॉर्म थे जिन्होंने देश के लिए कुर्बानी दी.
सवाल: बहुत-बहुत शुक्रिया अन्ना बात करने के लिए और ऑल द बेस्ट.
सुनील शेट्टी: थैंक यू, थैंक यू सो मच.
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