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पिता ने बोले थे सिर्फ 3 शब्द, बेटे ने बना डालीं 3 फिल्में, तीनों बनी ब्लॉकबस्टर, हिलाया बॉक्स ऑफिस

सूरज बड़जात्या के पिता राजकुमार बड़जात्या की एक सलाह ने ‘हम आपके हैं कौन’, ‘हम साथ-साथ हैं’ और ‘विवाह’ जैसी सदाबहार पारिवारिक फिल्मों को जन्म दिया, जो आज भी दर्शकों की पहली पसंद हैं.

पिता ने बोले थे सिर्फ 3 शब्द, बेटे ने बना डालीं 3 फिल्में, तीनों बनी ब्लॉकबस्टर, हिलाया बॉक्स ऑफिस
बॉलीवुड की इन 3 हिट फिल्मों के पीछे छिपा है एक पिता का दिमाग

बॉलीवुड में कई फिल्में आती हैं, खूब चर्चा बटोरती हैं और फिर धीरे-धीरे लोगों की यादों से गायब हो जाती हैं. लेकिन कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिन्हें सालों बाद भी लोग उतने ही प्यार से देखते हैं. टीवी पर आते ही लोग रिमोट रखना भूल जाते हैं. 'हम आपके हैं कौन', 'हम साथ-साथ हैं' और 'विवाह' ऐसी ही फिल्में हैं. दिलचस्प बात ये है कि इन तीनों फिल्मों के पीछे एक पिता की सोच थी. राजश्री प्रोडक्शन के सूरज बड़जात्या को उनके पिता राजकुमार बड़जात्या ने ऐसे विषयों पर फिल्म बनाने की सलाह दी, जिनमें परिवार, रिश्ते और अपनेपन की मिठास हो.

सूरज ने पिता की बात को गंभीरता से लिया और एक के बाद एक ऐसी फिल्में बनाईं, जिन्होंने दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली. इन फिल्मों में न बड़े-बड़े एक्शन थे और न ही शोर-शराबा, लेकिन फिर भी लोग इन्हें देखने के लिए सिनेमाघरों तक खिंचे चले आए.

जब 'हम आपके हैं कौन' ने हर घर में बनाई जगह

साल 1994 में रिलीज हुई 'हम आपके हैं कौन' ने लोगों को परिवार के साथ फिल्म देखने का नया मजा दिया. शादी-ब्याह, हंसी-मजाक, प्यार और रिश्तों से भरी इस फिल्म का हर किरदार लोगों को अपना सा लगा. सलमान खान और माधुरी दीक्षित की जोड़ी ने ऐसा रंग जमाया कि फिल्म के गाने से लेकर डायलॉग तक हर तरफ छा गए. आज भी कई शादियों में इस फिल्म के गाने सुनाई दे जाते हैं.

परिवार की ताकत दिखाकर छा गई 'हम साथ-साथ हैं'

'हम आपके हैं कौन' के बाद सूरज बड़जात्या नई कहानी पर काम कर रहे थे. तभी उनके पिता ने उन्हें परिवार को केंद्र में रखकर कहानी बनाने की सलाह दी. इसके बाद बनी 'हम साथ-साथ हैं'. फिल्म में बड़ा स्टारकास्ट था, लेकिन असली हीरो इसकी कहानी थी. भाई-बहन, माता-पिता और रिश्तों की गर्माहट ने दर्शकों का दिल जीत लिया. यही वजह रही कि रिलीज होते ही फिल्म ने तहलका मचा दिया.

एक खबर से निकली 'विवाह' की कहानी

जब 'मैं प्रेम की दीवानी हूं' उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई, तब सूरज बड़जात्या थोड़ा परेशान थे. ऐसे समय में उनके पिता ने उन्हें एक पुराने अखबार में छपी खबर दिखाई. इसी से 'विवाह' की कहानी का रास्ता निकला. शाहिद कपूर और अमृता राव की सादगी भरी प्रेम कहानी लोगों को इतनी पसंद आई कि फिल्म लंबे समय तक सुर्खियों में रही. इसके गाने और किरदार आज भी दर्शकों को याद हैं.

तीन फिल्में, एक फॉर्मूला और ढेर सारा प्यार

इन तीनों फिल्मों की सबसे बड़ी ताकत थी इनकी सादगी. परिवार, प्यार, सम्मान और रिश्तों को जिस अंदाज में दिखाया गया, वो सीधे लोगों के दिल तक पहुंचा. शायद यही वजह है कि सालों बाद भी ये फिल्में नई पीढ़ी को उतनी ही पसंद आती हैं, जितनी पहले दर्शकों को आई थीं.

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