ऋषि कपूर सिनेमा के सुपरस्टार थे. वह सिनेमा के शोमैन स्वर्गीय राज कपूर के बेटे और पृथ्वीराज कपूर के पोते थे. मेरा नाम जोकर उनकी पहली फिल्म थी जिसमें उन्होने अपने पिता के बचपन का रोल किया था. बतौर मुख्य अभिनेता के रूप में उनकी पहली फिल्म बॉबी थी, जिसमें उनके साथ डिंपल कपाड़िया भी थी. बाद में ऋषि कपूर को एक्ट्रेस नीतू सिंह से प्यार हो गया और दोनों ने 22 जनवरी 1980 में शादी कर ली. यह उस दौर में यादगार शादी थी. बॉलीवुड के दिग्गज राज कपूर ने अपने बेटे ऋषि कपूर की शादी को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इस शानदार शादी में फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े सितारे शामिल हुए, जिसमें अमिताभ बच्चन भी थे.

रिसेप्शन की सबसे खास बात थी पाकिस्तान के मशहूर कव्वाली उस्ताद नुसरत फतेह अली खान की शानदार परफॉर्मेंस, जिसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया. राज कपूर ने नुसरत को 1980 में ऋषि के संगीत समारोह में परफॉर्म करने के लिए खास तौर पर बुलाया था, जब बॉलीवुड नूसरत की कुछ खास पहचान नहीं थी

ऋषि कपूर नुसरत की दिल को छू लेने वाली धुनों पर जोश के साथ नाचते हुए दिखे, और उन्होंने डांस फ्लोर पर अपना खास अंदाज और जबरदस्त एनर्जी दिखाई. इस खास मौके पर उन्होंने क्लट गाना गाया था. वह है सांसों की माला. यह गाना भक्ति और रोमांटिक गाने के तौर पर यह गाना इतना मशहूर हुआ कि बाद में इसे कई फिल्मों और खास मौकों पर फिल्माया गया. दशकों बाद भी इस गाने का क्रेज बना हुआ है

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नुसरत के भतीजे, राहत फतेह अली खान भी शादी समारोह में मौजूद थे और उन्होंने अपने चाचा की शानदार परफॉर्मेंस को खुद देखा. यह संगीत की परफॉर्मेंस नुसरत के लिए भारत में एक टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जिससे आगे चलकर उनके शानदार बॉलीवुड करियर के रास्ते खुले.
23 जनवरी 1980 को चेंबूर के आरके स्टूडियो में हुए इस वेडिंग रिसेप्शन में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सेलिब्रिटी एक साथ शामिल हुए. असली इनविटेशन कार्ड से पता चला कि रिसेप्शन शाम 6:30 बजे से रात 9 बजे तक होना था और इसमें पूरे कपूर परिवार के नाम शामिल थे.
ऋषि कपूर और नीतू कपूर के दो बच्चे हैं, एक्टर रणबीर कपूर और बेटी रिद्धिमा कपूर साहनी. नुसरत की दिल को छू लेने वाली कव्वालियां बाद में बॉलीवुड में बहुत मशहूर हुईं; 'धड़कन' फिल्म का गाना "दूल्हे का सेहरा" और 'बादशाहो' का "मेरे रश्के कमर" जैसे गाने हमेशा के लिए लोकप्रिय हो गए.
बता दें कि नुसरत फतेह अली खान का 1997 में लंदन में 48 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया. वे अपने पीछे "कव्वाली के बेजोड़ बादशाह" (King of Kings of Qawwali) के तौर पर एक विरासत छोड़ गए.
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