बॉलीवुड के मशहूर निर्माता, निर्देशक, लेखक और अभिनेता गुरुदत्त की कुछ चुनिंदा फिल्मों के स्क्रीन प्ले को किताब की शक्ल दी जा चुकी है। इस किताब में गुरुदत्त की फिल्मों की कहानी के साथ-साथ उनकी ज़िन्दगी के और भी पहलुओं को पढ़ने का मौका मिलेगा। और इस किताब को गुरुदत्त की फिल्मो को किताब की शक्ल दी है मसहूर फिल्मकार विधु विनोद चोपड़ा ने।
गुरुदत्त के प्रोसुक्शन और निर्देशन में बनी फिल्म 1962 में रिलीज़ हुई 'साहेब बीवी और ग़ुलाम', 1960 में रिलीज़ हुई फिल्म 'चौदहवीं का चाँद' और 1959 की फिल्म 'कागज़ के फूल' को फिलहाल किताब की शक्ल दी गई है। ये किताब 23 फरवरी को रिलीज़ हो रही है और रिलीज़ के मौके पर विधु विनोद चोपड़ा के साथ गुरुदत्त के बडे फैन और चाहने वाले फिल्मकार फरहान अख्तर, अनुराग कश्यप और दिबाकर बेनर्जी मौजूद होंगे और गुरुदत्त की फिल्म मेकिंग और उनकी शख्सियत पर रौशनी डालेंगे।
बॉलीवुड गुरुदत्त को फिल्म मेकिंग का स्कूल मानता है और उनकी इज़्ज़त करता है। देश के बड़े-बड़े कला और फिल्म स्कूलों में गुरुदत्त की फिल्में पढ़ाई जाती हैं और इसी लिए विधु विनोद चोपड़ा ने इनकी फिल्मो को किताब की शक्ल दी है, ताकि आज के सिनेमा प्रेमी और फिल्मों के छात्र इसका फायदा उठा सकें। विधु विनोद चोपड़ा ने कहा है कि 'गुरुदत्त का सिनेमा हमेशा हम सबको प्रेरित करता रहता है और आकर्षित करता है। इस किताब के ज़रिये उस महान शख्स और फिल्मकार के लिए मेरी तरफ से श्राद्धांजलि है।'
विधु विनोद चोपड़ा ने अपने प्रोडक्शम हाउस में 2009 में एक डिवीज़न बनाया है किताबों के लिए जिसके तहत वो अपनी फिल्म 'लगे रहो मुन्ना भाई' और '3 इडियट्स' के स्क्रीनप्लेट की किताब रिलीज़ कर चुके हैं। अब विधु विनोद चोपड़ा एक कदम आगे बढ़ाते हुए गुरुदत्त की फिल्मों पर किताब तक बढ़े हैं।
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