बॉलीवुड में गैंगस्टर फिल्मों की कभी कमी नहीं रही. हर दौर में माफिया, गैंगवार और अंडरवर्ल्ड पर कई फिल्में बनीं, लेकिन एक फिल्म ऐसी आई जिसने सिर्फ गोलियां और गैंगस्टर नहीं दिखाए, बल्कि दुनिया की सबसे मशहूर कहानी को मुंबई की गलियों में उतार दिया. बड़े-बड़े डॉन, सत्ता की भूख, प्यार, धोखा और ऐसा सस्पेंस कि दर्शक आखिरी सीन तक स्क्रीन से नजर नहीं हटा पाए. रिलीज के समय यह फिल्म ज्यादा नहीं चली, लेकिन बाद में लोगों ने इसे भारतीय सिनेमा की सबसे शानदार फिल्मों में गिनना शुरू कर दिया. दिलचस्प बात यह है कि यह फिल्म विलियम शेक्सपियर के मशहूर किताब 'मैकबेथ' पर बनी 'मकबूल' थी.
जब मुंबई का अंडरवर्ल्ड बना 'मैकबेथ' का नया ठिकाना
साल 2003 में रिलीज हुई 'मकबूल' को विशाल भारद्वाज ने बिल्कुल अलग अंदाज में बनाया. उन्होंने शेक्सपियर की कहानी को बिल्कुल वैसा नहीं दिखाया, बल्कि उसे मुंबई के अंडरवर्ल्ड में इस तरह ढाल दिया कि पूरी कहानी भारतीय लगने लगी. फिल्म में गैंगवार, सत्ता की लड़ाई, प्यार, लालच और विश्वासघात का ऐसा तड़का है, जो इसे बाकी गैंगस्टर फिल्मों से अलग बना देता है.
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इरफान खान ने दिखाया एक्टिंग का असली जादू
फिल्म में इरफान खान ने मकबूल का किरदार निभाया और ऐसी एक्टिंग की, कि आज भी लोग उसकी मिसाल देते हैं. कई सीन में उन्होंने बिना ज्यादा डायलॉग बोले सिर्फ अपने चेहरे और आंखों से किरदार का दर्द दिखा दिया. यही वजह है कि इस रोल को उनके करियर की सबसे दमदार परफॉर्मेंस में गिना जाता है.
तब्बू और पंकज कपूर ने लूट ली पूरी महफिल
तब्बू ने निम्मी का किरदार निभाया, जो प्यार, लालच और पछतावे के बीच फंसी एक ऐसी महिला है, जो पूरी कहानी को आगे बढ़ाती है. वहीं पंकज कपूर और ओम पुरी ने दो पुलिस अफसरों का रोल निभाया. शेक्सपियर की कहानी में जहां तीन चुड़ैलें भविष्य बताती हैं, वहीं विशाल भारद्वाज ने उनकी जगह इन दोनों किरदारों को रखा. दोनों की एक्टिंग और डायलॉग फिल्म की सबसे बड़ी खासियत बन गए.
बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली, लेकिन वक्त ने बदल दी किस्मत
रिलीज के समय 'मकबूल' ने बॉक्स ऑफिस पर कोई बड़ा रिकॉर्ड नहीं बनाया. लेकिन जैसे-जैसे लोगों ने इसे देखा, इसकी तारीफ बढ़ती गई. आज ये फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन कल्ट क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है. फिल्म स्कूलों में इसकी स्क्रीनप्ले, डायरेक्शन और एक्टिंग का उदाहरण दिया जाता है.
यहीं से शुरू हुई विशाल भारद्वाज की सुपरहिट ट्रिलॉजी
बहुत कम लोग जानते हैं कि 'मकबूल' विशाल भारद्वाज की शेक्सपियर ट्रिलॉजी की पहली फिल्म थी. इसके बाद उन्होंने 'ओमकारा' और 'हैदर' बनाई. तीनों फिल्मों ने साबित कर दिया कि दुनिया के सबसे बड़े साहित्य को भी भारतीय अंदाज में शानदार तरीके से बड़े पर्दे पर उतारा जा सकता है.
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