दिल्ली में वर्ल्ड अल्जाइमर डे के मौके पर अभिनेत्री लारा दत्ता भूपति अल्जाइमर अवेयरनेस की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुई. प्रेस कॉन्फ्रेंस से बाहर आने के बाद उन्होंने मीडिया से बात की और लोगों से अपील की कि अल्जाइमर को केवल भूलने की बीमारी समझकर नजरअंदाज नहीं करें. इस बीमारी को लेकर परिवार में समय रहते बातचीत शुरू करना जरूरी है ताकि इसके शुरुआती संकेतों को पहचाना जा सके और जरूरत पड़ने पर सही मदद ली जा सके.
क्या बोलीं लारा दत्ता
लारा दत्ता ने कहा, ''आज वर्ल्ड अल्जाइमर डे है और सबसे जरूरी मैसेज जो मैं देना चाहती हूं, वह यह है कि हम अक्सर सोचते हैं कि अल्जाइमर सिर्फ भूलने की बीमारी है. मेरी मां 80 साल की हैं और वह करीब 10 साल से अल्जाइमर और डिमेंशिया के साथ जी रही हैं.''
अच्छे डॉक्टर की निगरानी में
उन्होंने कहा, ''जिस तरह की देखभाल हम उन्हें दे पाए हैं, वह अच्छे डॉक्टरों, एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम और देखभाल करने वालों की मदद के बिना मुमकिन नहीं होती. इसलिए जब अल्जाइमर की बात आती है तो आज सबसे जरूरी बात यह है कि हम इसके बारे में बात करें और बातचीत शुरू करें.''
लारा के कहा, ''बीमारी के शुरुआती संकेतों को समझना बेहद जरूरी है. हमें जितनी जल्दी हो सके शुरुआत करनी चाहिए, ताकि बीमारी को उसके शुरुआती स्टेज में पहचाना जा सके और खुद को मजबूत बनाया जा सके. अगर हमें अपने किसी करीबी में या खुद में सोचने या याददाश्त में बदलाव महसूस होने लगे, तो हम सही तरीके से मदद ले सकें.''
लोगों से की अपील
अभिनेत्री ने लोगों से अपील की, कि हर तरह की भूलने की समस्या को सामान्य उम्र बढ़ने का हिस्सा मान लेना सही नहीं है. उन्होंने कहा, ''इसे सिर्फ भूलने की समस्या समझकर पांच साल इंतजार मत कीजिए कि देखते हैं क्या होता है. यह बहुत जरूरी है कि आप इसे सामान्य उम्र बढ़ने की प्रक्रिया मानकर न चले.''
इसके अलावा, लारा दत्ता ने लोगों से अच्छे हेल्थकेयर प्रैक्टिशनर से मिलने, सवाल पूछने और जरूरत के मुताबिक सपोर्ट सिस्टम तैयार करने की अपील की. उन्होंने कहा, ''अल्जाइमर या डिमेंशिया के साथ रह रहे व्यक्ति के साथ-साथ उसकी देखभाल करने वाले परिवार के सदस्यों को भी मदद और सहयोग की जरूरत होती है.''
21 सितंबर को वर्ल्ड अल्जाइमर डे
बता दें कि हर साल 21 सितंबर को वर्ल्ड अल्जाइमर डे मनाया जाता है. अल्जाइमर डिमेंशिया का सबसे आम कारण है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, साल 2021 में दुनिया भर में करीब 5.7 करोड़ लोग डिमेंशिया के साथ रह रहे थे और हर साल लगभग एक करोड़ नए मामले सामने आते हैं. डिमेंशिया याददाश्त के साथ सोचने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है. साल 2026 के वर्ल्ड अल्जाइमर मंथ की थीम 'द अर्लियर यू नो, द मोर यू कैन डू: ए डिमेंशिया डायग्नोसिस मैटर्स' है.
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