चार अगस्त को हिंदी सिनेमा के महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार की जयंती मनाई जाती है. अपनी अनोखी आवाज, शानदार अदायगी और मस्ती भरे अंदाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले किशोर कुमार ने हजारों यादगार गीत गाए. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि रिकॉर्डिंग स्टूडियो में बेझिझक गाने वाले किशोर कुमार स्टेज पर लाइव परफॉर्म करने से घबराते थे. सार्वजनिक मंच पर गाना उनके लिए बेहद मुश्किल काम था और इसी झिझक को दूर करने में अभिनेता सुनील दत्त ने अहम भूमिका निभाई थी.
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मुश्किल से किया स्टेज शो
देश-विदेश में किशोर कुमार के लाखों प्रशंसक थे और हर कोई उन्हें मंच पर गाते हुए देखना चाहता था. अभिनेता सुनील दत्त, जो फिल्म “पड़ोसन” में उनके साथ काम कर चुके थे, लगातार उन्हें लाइव परफॉर्मेंस देने के लिए प्रेरित करते रहे. हालांकि किशोर कुमार हर बार इससे बचने की कोशिश करते थे. करीब एक साल तक समझाने के बाद आखिरकार वे अपना पहला स्टेज शो करने के लिए तैयार हुए.
भारतीय सेना के लिए कार्यक्रम
उनका पहला लाइव कार्यक्रम गंगटोक में भारतीय सेना के जवानों के लिए रखा गया था. जब किशोर कुमार वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि कड़ाके की ठंड में बड़ी संख्या में जवान बर्फ पर बैठे उनके आने का इंतजार कर रहे हैं. यह नजारा देखकर उनकी घबराहट और बढ़ गई. एक तो कड़ाके की सर्दी और ऊपर से इतने सारे जवान उनका इंतजार कर रहे थे. उन्होंने सुनील दत्त से साफ कह दिया कि वे इतने लोगों के सामने नहीं गा पाएंगे.
सुनील दत्त ने बढ़ाया मनोबल
दर्शकों को याद होगा कि फिल्म “पड़ोसन” में सुनील दत्त, किशोर कुमार को “गुरु” कहकर बुलाते थे. ऐसे में सुनील दत्त ने उन्हें फिल्म का वही मशहूर दृश्य याद दिलाया, जिसमें वे खिड़की के सामने खड़े होकर सायरा बानो को रिझाने के लिए होंठ हिलाते हैं, जबकि असल में पर्दे के पीछे खड़े किशोर कुमार गाना गा रहे होते हैं. यानी सुनील दत्त केवल लिप-सिंक कर रहे होते हैं. उन्होंने किशोर कुमार से कहा कि स्टेज पर भी वही तरीका अपनाते हैं. मैं जवानों के सामने खड़ा रहूंगा, मेरे पीछे माइक्रोफोन होगा और आप उसके पीछे खड़े होकर गाइए. जवानों को सिर्फ़ मैं दिखाई दूंगा.
तालियों की गड़गड़ाहट
किशोर कुमार को यह सुझाव पसंद आ गया और शो शुरू हुआ. सुनील दत्त सबसे आगे खड़े हुए और उनके पीछे माइक्रोफोन के पास किशोर कुमार गाने लगे. कुछ देर बाद जब सुनील दत्त को लगा कि किशोर कुमार पूरी तरह गीत में डूब चुके हैं और आंखें बंद करके गा रहे हैं, तो वे धीरे से सामने से हट गए. जैसे ही जवानों की नजर गाना गाते हुए किशोर कुमार पर पड़ी, उन्होंने जोरदार तालियां बजानी शुरू कर दीं. तालियों की गड़गड़ाहट सुनकर किशोर कुमार ने आंखें खोलीं. पहले तो वे थोड़ा घबराए, लेकिन अगले ही पल खुद को संभाला और पूरे आत्मविश्वास के साथ गाना जारी रखा.
कहा जाता है कि यही वह पल था जिसने किशोर कुमार की वर्षों पुरानी स्टेज पर गाने की झिझक को हमेशा के लिए खत्म कर दिया. इसके बाद उन्होंने कई लाइव कार्यक्रम किए और अपनी जादुई आवाज से दर्शकों का दिल जीतते रहे. यह किस्सा बताता है कि कभी-कभी किसी करीबी दोस्त का भरोसा इंसान के सबसे बड़े डर को भी दूर कर देता है.
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