हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गायक हुए जिनकी आवाज ने लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी, लेकिन किशोर कुमार की बात ही कुछ अलग थी. उनकी आवाज में कभी प्यार की मिठास सुनाई देती थी, तो कभी जुदाई का दर्द दिल को छू जाता था. मस्ती भरे गानों से लेकर जिंदगी की गहरी भावनाओं को बयां करने वाले गीतों तक, किशोर दा ने हर अंदाज में लोगों को अपना दीवाना बनाया. हालांकि किशोर कुमार सिर्फ अपनी गायकी के लिए ही मशहूर नहीं थे, बल्कि उनका मस्तमौला स्वभाव, बेबाक अंदाज और जिंदगी से जुड़े दिलचस्प किस्से भी काफी मशहूर थे.
मध्य प्रदेश के खंडवा में 4 अगस्त 1929 को जन्मे किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था. उनके बड़े भाई अशोक कुमार हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता थे. घर में फिल्मी माहौल होने के कारण किशोर कुमार का भी मनोरंजन जगत की तरफ रुझान बढ़ा. उन्होंने साल 1948 में 'जिद्दी' के लिए अपना पहला हिंदी फिल्मी गाना गाया. ये गाना था 'मरने की दुआएं क्यों मांगूं' इस वक्त उनकी उम्र महज 19 साल थी. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपनी आवाज के दम पर संगीत की दुनिया में एक अलग पहचान बना ली.
किशोर कुमार की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह हर तरह के गाने को अपने अंदाज में गाते थे. रोमांटिक गीत हों, दर्द भरे नगमे हों या फिर मस्ती से भरपूर गाने, उनकी आवाज हर रंग में ढल जाती थी. 'मेरे सपनों की रानी', 'रूप तेरा मस्ताना', 'ओ मेरे दिल के चैन', 'पल पल दिल के पास', 'जिंदगी एक सफर है सुहाना' और 'आने वाला पल जाने वाला है' जैसे गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं. उन्होंने सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि बंगाली, मराठी, गुजराती, असमिया, कन्नड़, भोजपुरी और दूसरी भाषाओं में भी गाने गाए. उनकी गायकी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दशकों बाद भी उनके गाने नए और पुराने, दोनों तरह के श्रोताओं को पसंद आते हैं.
-किशोर कुमार का पहला गाना-
किशोर कुमार अपने अतरंगी अंदाज के लिए भी खूब मशहूर थे. जहां आमतौर पर लोग अपने घर के बाहर 'कुत्तों से सावधान' जैसा बोर्ड लगाते हैं, वहीं किशोर दा ने अपने घर के बाहर 'किशोर कुमार से सावधान' लिखवा रखा था. वह आम लोगों की तरह जिंदगी जीने के बजाय अपने नियमों पर चलना पसंद करते थे. उनकी बेबाकी के किस्से फिल्मी दुनिया में अक्सर चर्चा का विषय बने रहते थे. वह अपनी बात कहने से पीछे नहीं हटते थे और अपने काम को लेकर भी काफी स्पष्ट रहते थे.
किशोर कुमार से जुड़ा एक मजेदार किस्सा फिल्म निर्माता आरसी तलवार से भी जुड़ा है. कहा जाता है कि जब उनके कुछ पैसे बकाया रह गए, तो किशोर दा रोज सुबह निर्माता के घर पहुंच जाते थे. वहां वह जोर-जोर से आवाज लगाते हुए कहते थे, हे तलवार, दे दे मेरे आठ हजार. किशोर कुमार की जिंदगी का एक चर्चित अध्याय आपातकाल के दौर से जुड़ा है. बताया जाता है कि साल 1975-77 के दौरान सरकार के एक कार्यक्रम के लिए गाने के अनुरोध को उन्होंने स्वीकार नहीं किया था. इसके बाद ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर उनके गानों के प्रसारण पर रोक लगा दी गई थी.

Photo Credit: kishore kumar
किशोर कुमार की निजी जिंदगी भी काफी उतार-चढ़ाव भरी रही. उन्होंने चार शादियां की थीं. उनकी पहली पत्नी रूमा गुहा ठाकुरता थीं. इसके बाद उन्होंने अभिनेत्री मधुबाला से शादी की. फिर योगिता बाली और लीना चंदावरकर उनकी जीवनसंगिनी बनीं. 13 अक्टूबर 1987 को किशोर कुमार इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन उनकी आवाज आज भी करोड़ों दिलों में जिंदा है. वह ऐसे कलाकार थे, जिन्होंने अपनी गायकी से लोगों को हंसाया, रुलाया और प्यार करना भी सिखाया.
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