विभाजन को हिंदी सिनेमा ने कई बार पर्दे पर उतारा है. कहीं इसके बैकड्रॉप पर प्रेम कहानी दिखाई गई, तो कहीं विस्थापित लोगों के दर्द और बिछड़ने की तकलीफ को कहानी का आधार बनाया गया. हाल ही में रिलीज हुई सनी देओल की ‘बंटवारा 1947' भी विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म थी. हालांकि, ऐसी ज्यादातर फिल्मों में विभाजन के दौरान हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच पैदा हुए तनाव, विस्थापन और रिश्तों की कहानियों को केंद्र में रखा गया है. अब एक फिल्म रिलीज के लिए तैयार है, जो विभाजन के दौरान सिंधी समुदाय के दर्द और विस्थापन की कहानी को सामने लाने की कोशिश कर रही है. इस फिल्म का नाम है ‘जय हिंद, जय सिंध: अ लव स्टोरी'.
सिंधी समुदाय की दर्दभरी कहानी
विभाजन से पहले सिंध अविभाजित भारत का हिस्सा था. 1947 में देश के विभाजन के बाद सिंध का अधिकांश हिस्सा पाकिस्तान में चला गया. इसके बाद वहां रहने वाले बड़ी संख्या में सिंधी हिंदुओं को अपना घर, जमीन और कारोबार छोड़कर भारत आना पड़ा. कई परिवारों के लिए यह सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह जाने की घटना नहीं थी, बल्कि अपनी जड़ों, संपत्ति और उस दुनिया से बिछड़ने का दर्द था, जिसमें उनकी कई पीढ़ियां रह चुकी थीं.
‘जय हिंद, जय सिंध' इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को एक प्रेम कहानी के जरिए सामने लाने की कोशिश करती है. फिल्म की कहानी दो युवाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जबकि विभाजन इसका अहम बैकड्रॉप है. कहानी में एक दादा और उसके पोते के रिश्ते को भी जोड़ा गया है. इसके जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई है कि किसी ऐतिहासिक घटना का असर उस दौर के लोगों तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी यादें और उसका भावनात्मक प्रभाव अगली पीढ़ियों तक भी पहुंचता है.
कहानी व्यक्तिगत और सामुदायिक स्मृतियों से जुड़ी
फिल्म के निर्माता सैमी नानवानी के लिए सिंधी समुदाय के विस्थापन की यह कहानी व्यक्तिगत और सामुदायिक स्मृतियों से जुड़ी हुई है. उनका कहना है, “उन्होंने अपनी जमीन, अपनी संपत्ति, अपने माता-पिता और अपने बच्चों को खोया. आज भी बहुत से सिंधी उस दर्द को अपने साथ लेकर चलते हैं. वह गहरा घाव अभी तक पूरी तरह नहीं भरा है.”
फिल्म के शीर्षक में भी सिंध की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान की ओर इशारा मिलता है. भारत के राष्ट्रगान ‘जन गण मन' में “पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा…” का उल्लेख आता है. फिल्म इसी साझा इतिहास और सांस्कृतिक स्मृति को एक नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश करती है. खासतौर पर उन दर्शकों के लिए, जो सिंधी समुदाय के विभाजन और उसके बाद हुए बड़े पैमाने के विस्थापन के बारे में बहुत कम जानते हैं.
फिल्म की स्टारकास्ट
हालांकि फिल्म को केवल विभाजन की त्रासदी के रूप में नहीं पेश किया गया है. इसमें प्रेम, परिवार और पीढ़ियों के बीच बदलते रिश्तों को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है. फिल्म में पांच गाने हैं, जिनमें कहानी के रोमांटिक और भावनात्मक पक्ष को उभारा गया है.
‘जय हिंद, जय सिंध: अ लव स्टोरी' में महेश मांजरेकर, जया प्रदा, छाया कदम, राहुल देव, विक्रम कोचर, जरीना वहाब, अमित बहल, इंदिरा तिवारी, उपासना सिंह, एहसान खान, पूजा कात्याल, अजित शिधाये, अंकित अरोड़ा, राजवीर सिंह, नानक सिंह, कार्तिकेय मालवीय, फातिमा आयशा खान और गरिमा अग्रवाल नजर आएंगे. फिल्म से गौरवव धिंगरा और अकैशा वत्स अभिनय की शुरुआत कर रहे हैं.
अन्य भाषा में रिलीज होगी फिल्म
फिल्म को हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु और कन्नड़ में भी देशभर में रिलीज करने की तैयारी है. इस तरह ‘जय हिंद, जय सिंध' विभाजन की एक ऐसी कहानी को बड़े पर्दे पर लाने की कोशिश कर रही है, जिसमें एक समुदाय के विस्थापन और उसकी पीढ़ियों तक चली आ रही स्मृतियों को प्रेम कहानी के साथ जोड़ा गया है. फिल्म के जरिए सिंधी समुदाय के उस इतिहास को सामने लाने की कोशिश है, जो 1947 के बाद भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक कहानी का हिस्सा तो बना, लेकिन मुख्यधारा की विभाजन-कथाओं में अपेक्षाकृत कम दिखाई दिया.
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