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कुमार सानू की आवाज, दिव्या भारती की मासूमियत और अधूरी मोहब्बत, 34 साल बाद भी 318 मिलियन व्यूज बटोर रहा है ये गाना

एक मासूम चेहरा, दर्दभरी आवाज और अधूरी मोहब्बत की कहानी ने इस गीत को अमर बना दिया. 34 साल बाद भी 318 मिलियन व्यूज के साथ इसका क्रेज कम होने का नाम नहीं ले रहा.

कुमार सानू की आवाज, दिव्या भारती की मासूमियत और अधूरी मोहब्बत, 34 साल बाद भी 318 मिलियन व्यूज बटोर रहा है ये गाना

90 के दशक के रोमांटिक गानों की बात हो और ‘सोचेंगे तुम्हें प्यार करें कि नहीं' का जिक्र न आए, ऐसा शायद ही हो. फिल्म ‘दीवाना' (1992) का यह सदाबहार गीत आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में अपनी जगह बनाए हुए है. कुमार सानू की दर्दभरी आवाज, नदीम-श्रवण का मधुर संगीत और समीर के खूबसूरत बोल इस गाने को खास बनाते हैं. वहीं स्क्रीन पर दिव्या भारती की मासूमियत और ऋषि कपूर के साथ उनकी केमिस्ट्री इसे और यादगार बना देती है. यही वजह है कि रिलीज के तीन दशक बाद भी यह गाना पुराना नहीं लगता. दिलचस्प बात यह है कि यूट्यूब पर दो अलग-अलग चैनलों पर इस गीत को मिलाकर करीब 318 मिलियन व्यूज मिल चुके हैं, जो इसकी आज भी बरकरार लोकप्रियता का सबूत हैं.

फिल्म ‘दीवाना' ने बदल दी थी कई सितारों की किस्मत

1992 में रिलीज हुई ‘दीवाना' का निर्देशन राज कंवर ने किया था. फिल्म में ऋषि कपूर, दिव्या भारती और शाहरुख खान मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे. यह शाहरुख खान की पहली रिलीज फिल्म भी थी, जिसने उन्हें बॉलीवुड में मजबूत शुरुआत दिलाई. फिल्म की कहानी, रोमांस और संगीत को दर्शकों ने खूब पसंद किया. खास बात यह रही कि नदीम-श्रवण का संगीत फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बना. ‘ऐसी दीवानगी', ‘तेरी उम्मीद तेरा इंतजार' और ‘सोचेंगे तुम्हें प्यार करें कि नहीं' जैसे गाने आज भी सदाबहार माने जाते हैं. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी सफल रही और इसके संगीत ने कई पुरस्कार अपने नाम किए. कुमार सानू को ‘सोचेंगे तुम्हें प्यार करें कि नहीं' के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर मेल का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला. 

दिव्या भारती की मासूमियत ने बना दिया था गाने को अमर

‘सोचेंगे तुम्हें प्यार करें कि नहीं' सिर्फ एक रोमांटिक गीत नहीं, बल्कि 90 के दशक की भावनाओं का हिस्सा बन चुका है. गाने में दिव्या भारती की मासूमियत आज भी दर्शकों का दिल जीत लेती है. उनकी असमय मृत्यु ने उनके फिल्मी सफर को अधूरा छोड़ दिया, लेकिन इस तरह के गीतों ने उन्हें हमेशा के लिए यादगार बना दिया. फिल्म के गीतों के बोल समीर ने लिखे थे और संगीत नदीम-श्रवण ने तैयार किया था, जबकि कुमार सानू की आवाज ने इस गीत को एक अलग पहचान दी. यही कारण है कि आज भी सोशल मीडिया और म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर यह गीत लगातार सुना जाता है और नई पीढ़ी भी इसे उतना ही पसंद करती है, जितना 90 के दशक के दर्शक करते थे.

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