धर्मेंद्र और मीना कुमारी की ‘फूल और पत्थर' साल 1966 में रिलीज हुई ऐसी फिल्म थी, जिसने धर्मेंद्र के करियर को नई दिशा दी. यह फिल्म 50 हफ्ते यानी करीब 350 दिनों तक सिनेमाघरों में चलने वाली गोल्डन जुबली फिल्म थी. फिल्म का निर्देशन ओ.पी. रल्हन ने किया था और धर्मेंद्र के साथ मीना कुमारी, शशिकला और ललिता पवार जैसे कलाकार नजर आए थे. फिल्म की कहानी एक सख्त मिजाज अपराधी और एक विधवा महिला के इर्द-गिर्द घूमती है. फिल्म की सफलता में इसकी कहानी के साथ-साथ संगीत का भी बड़ा योगदान रहा. क्या थी फिल्म की कहानी और क्या हैं इससे जुड़े फैक्ट्स, आइए जानते हैं.
धर्मेंद्र के करियर का बना बड़ा मोड़
‘फूल और पत्थर' में धर्मेंद्र ने शाका नाम के एक सख्त और अपराध की दुनिया से जुड़े युवक का किरदार निभाया था. वहीं मीना कुमारी ने शांति देवी की भूमिका निभाई. कहानी में शाका की जिंदगी उस वक्त बदलने लगती है, जब उसका सामना शांति से होता है. एक महिला की मुश्किल जिंदगी और उसकी मजबूरियां शाका के अंदर बदलाव की शुरुआत करती हैं.
ये Video भी देखें: Haiwaan Review: अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी का कमाल या निराशा?
इस फिल्म को धर्मेंद्र के करियर की पहली बड़ी सफल फिल्मों में गिना जाता है. यह फिल्म सिनेमाघरों में 50 हफ्तों तक चली और इसकी सफलता ने धर्मेंद्र के करियर को नई दिशा दी. फिल्म के बाद धर्मेंद्र और मीना कुमारी की जोड़ी भी दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुई.
रवि के संगीत और शकील बदायूंनी के गीतों ने बांधा समां
‘फूल और पत्थर' का संगीत रवि ने तैयार किया था, जबकि गीत शकील बदायूंनी ने लिखे थे. फिल्म के साउंडट्रैक में कुल सात गाने दर्ज हैं, जिन्हें आशा भोंसले और मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज दी. इनमें ‘लायी है हजारों रंग होली', ‘शीशे से पी या पैमाने से', ‘जिंदगी में प्यार करना सीख ले', ‘सुन ले पुकार', ‘मेरे दिल के अंदर' और ‘तुम कौन मामूल मैं कौन' जैसे गाने शामिल हैं.
खास बात यह थी कि फिल्म में धर्मेंद्र पर कोई गाना फिल्माया नहीं गया था. इसके बावजूद कहानी और अभिनय के साथ संगीत ने फिल्म को दर्शकों के बीच खास पहचान दिलाई. ‘शीशे से पी या पैमाने से' और ‘जिंदगी में प्यार करना सीख ले' जैसे गाने शशिकला पर फिल्माए गए थे, जबकि ‘सुन ले पुकार' मीना कुमारी से जुड़ा गीत था.
60 साल बाद भी याद किए जाते हैं गाने
फिल्म की लोकप्रियता केवल बॉक्स ऑफिस तक सीमित नहीं रही. ‘फूल और पत्थर' के गाने आज भी पुराने हिंदी फिल्म संगीत के शौकीनों के बीच सुने जाते हैं. मोहम्मद रफी की आवाज में ‘मेरे दिल के अंदर' और ‘तुम कौन मामूल मैं कौन' तथा आशा भोंसले के गीतों ने फिल्म के संगीत को अलग पहचान दी. फिल्म की सफलता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इसे 1966 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में बताया गया है. फिल्म ने धर्मेंद्र को स्टारडम दिलाने में अहम भूमिका निभाई और उन्हें फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए नामांकन भी मिला.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं