हिंदी सिनेमा में कुछ रिश्तों की कहानियां बेहद ही हैरानी भरी है. इनका संयोग भी चौंका देने वाला है. ऐसा ही एक संयोग है बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर अशोक कुमार (Ashok Kumar) और एवरग्रीन सिंगर-एक्टर किशोर कुमार (Kishore Kumar) का. एक ने अपनी अदाकारी से भारतीय सिनेमा को नई पहचान दी, तो दूसरे ने अपनी आवाज से कई पीढ़ियों के दिलों पर राज किया. दोनों सगे भाई थे, लेकिन उनकी शख्सियत और काम करने का अंदाज बिल्कुल अलग था. दिलचस्प संयोग यह है कि अशोक कुमार का जन्म 13 अक्तूबर (13 October) को हुआ था, जबकि किशोर कुमार ने 13 अक्तूबर के दिन ही दुनिया को अलविदा कहा था.
13 अक्तूबर से जुड़ी दो भाइयों की कहानी
अशोक कुमार का जन्म 13 अक्तूबर 1911 को बिहार के भागलपुर में हुआ था. उनका असली नाम कुमुदलाल गांगुली था. हिंदी सिनेमा में उन्हें दादामुनि के नाम से भी जाना जाता है. वहीं, किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त, 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा में हुआ था. उनका असली नाम आभास कुमार गांगुली था. वह अशोक कुमार के छोटे भाई थे. किशोर कुमार ने 13 अक्तूबर 1987 को मुंबई में अंतिम सांस ली. इस तरह 13 अक्तूबर की तारीख दोनों भाइयों की जिंदगी से एक खास और भावुक संयोग के रूप में जुड़ गई.
अशोक कुमार बने एक्टर
अशोक कुमार ने 1936 की फिल्म 'जीवन नैया' से एक्टिंग करियर की शुरुआत की. इसी दौर में आई फिल्म 'अछूत कन्या' ने भी उन्हें पहचान दिलाई. देविका रानी के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों के बीच चर्चित हुई और वह धीरे-धीरे हिंदी सिनेमा के स्टार बन गए.
अशोक कुमार की खासियत यह थी कि वह हर तरह के किरदार में खुद को ढाल लेते थे. किस्मत, महल, ज्वेल थीफ, आशीर्वाद और खूबसूरत जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग रंग देखने को मिले. उन्होंने उस दौर में अभिनय की ऐसी शैली अपनाई, जो बनावटी संवाद अदायगी से दूर और स्वाभाविकता के करीब थी. आशीर्वाद उनके करियर की सबसे शानदार फिल्मों में गिनी जाती है. इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था.
किशोर कुमार ने आवाज से रचा इतिहास
किशोर कुमार की पहचान सिर्फ एक सिंगर की नहीं थी. वह एक्टर, संगीतकार, गीतकार और फिल्म निर्माता भी थे. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फिल्मों में एक्टिंग से की, लेकिन उनकी गायकी ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बना दिया. आराधना, अमर प्रेम, चलती का नाम गाड़ी, पड़ोसन और झुमरू जैसी फिल्मों से उनका जुड़ाव उनके मल्टीटैलेंटेड होने की ओर इशारा करता है. वहीं मेरे सपनों की रानी, रूप तेरा मस्ताना, कुछ तो लोग कहेंगे, जिंदगी एक सफर है सुहाना और ये शाम मस्तानी जैसे गाने संगीत प्रेमियों में पॉपुलर हैं.
अशोक कुमार और किशोर कुमार की राहें अलग थीं, लेकिन दोनों ने हिंदी सिनेमा को ऐसी विरासत दी, जो आज भी कायम है. अशोक कुमार ने अभिनय के जरिए अपनी छाप छोड़ी, जबकि किशोर कुमार ने अपनी आवाज से फिल्मों के कई यादगार पलों को अमर बना दिया.
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