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एयर फोर्स में जाना चाहते थे अनंत नाग, किस्मत ने बना दिया सिनेमा का बड़ा नाम

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार 2024 के लिए चुने गए वरिष्ठ कन्नड़ अभिनेता अनंत नाग ने हाल ही में आईएएनएस से बातचीत में अपने छोटे भाई शंकर नाग को याद किया.

एयर फोर्स में जाना चाहते थे अनंत नाग, किस्मत ने बना दिया सिनेमा का बड़ा नाम
एयर फोर्स में जाना चाहते थे अनंत नाग, किस्मत ने बना दिया सिनेमा का बड़ा नाम
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दादा साहेब फाल्के पुरस्कार 2024 के लिए चुने गए वरिष्ठ कन्नड़ अभिनेता अनंत नाग ने हाल ही में आईएएनएस से बातचीत में अपने छोटे भाई शंकर नाग को याद किया. शंकर नाग ने 1990 के दशक में लोकप्रिय टीवी सीरीज 'मालगुडी डेज' का निर्देशन किया था. अनंत नाग ने इस सीरीज में कई किरदार निभाए थे और कहा कि हिंदी भाषा में उनकी पहचान इसी शो से बनी. अनंत नाग ने कहा, 'हिंदी में 'मालगुडी डेज' अलग है. मेरे छोटे भाई शंकर ने सारी मेहनत की और 'मालगुडी डेज' डायरेक्ट किया. वह मुझसे छह साल छोटे थे. 36 साल पहले कार एक्सीडेंट में उनका निधन हो गया.'

क्या बोले अनंत नाग

उन्होंने बताया कि कमर्शियल फिल्मों में आने से पहले उन्होंने करीब 30-35 आर्ट फिल्में कीं. उन्होंने कहा, 'मैं कन्नड़ फिल्मों की नई लहर से आया था. ये फिल्में अलग किस्म की होती थीं. श्याम बेनेगल जैसे लोगों ने अलग मकसद से काम किया. लेकिन ऐसी फिल्में खासकर कर्नाटक में बनती थीं. इन्हें आर्ट फिल्में कहते हैं. मेरी पहली 30-35 फिल्में आर्ट फिल्में थीं. फिर मैंने कमर्शियल फिल्मों के ऑफर स्वीकार करने शुरू किए क्योंकि उनमें पैसे ज्यादा मिलते थे. मुझे कभी पछतावा नहीं हुआ. जब भी मौका मिला, मैंने आर्ट फिल्में कीं. पड़ोसी भाषाओं में भी काम किया. तेलुगु, मलयालम और अमोल पालेकर के साथ एक मराठी फिल्में भी बनाईं. मैंने कन्नड़ में 75 फिल्में कीं.'

गुरुओं के सहयोग को किया याद

अनंत नाग ने अपने गुरुओं और पत्रकारों के सहयोग को भी याद किया. उन्होंने कहा कि कर्नाटक आने के बाद पत्रकार दोस्तों ने उनका बड़ा साथ दिया. उन्होंने आगे कहा, 'उस समय जो लोग मेरे साथ खड़े रहे और खासकर मदद की, वे पत्रकारिता के लोग और मेरे पत्रकार दोस्त थे. मेरा दोस्त सर्कल सिर्फ प्रेस था. मैं किसी क्लब का सदस्य नहीं था, लेकिन प्रेस क्लब का नियमित सदस्य था.'

एयर फोर्स में जाने का सपना

1948 में शिराली, भटकल में जन्मे अनंत नाग का बचपन का नाम अनंत नागारकट्टे था. 16 साल से पहले वे मुंबई चले गए. शुरू में वे एयर फोर्स में जाना चाहते थे, लेकिन यह सपना पूरा नहीं हुआ. फिर उन्होंने थिएटर में काम शुरू किया. अनंत नाग ने 300 से ज्यादा फिल्में की हैं. वे कन्नड़, हिंदी, कोंकणी, मराठी और तेलुगु सिनेमा में काम कर चुके हैं. उनकी पहली हिंदी फिल्म 'अंकुर' को तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिले थे. वे आज भी सक्रिय हैं और नई फिल्मों की कहानियां सुनते रहते हैं. उन्होंने प्रोड्यूसर और राजनीतिज्ञ के रूप में भी काम किया है.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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