म्यूजिक और डांस कॉन्सर्ट आज कोई नई बात नहीं लेकिन जब बात भारतीय क्लासिकल डांस और म्यूजिक की आती है तो बात कुछ और ही हो जाती है. 30 अगस्त की शाम कुछ ऐसी ही रही. कथा वाचन की संस्थापक आर.भार्गवी सुदर्शन ने जिम्मा उठाया और अनंत के नाम से एक खास प्रोग्राम आयोजित किया. इस कार्यक्रम में ना केवल अलग अलग तरह के संगीत का समन्वय देखने को मिला जबकि कथक के जरिए भगवान कृष्ण की एक लीला भी देखने को मिली.
कार्यक्रम की शुरुआत कर्नाटक संगीत और हिंदुस्तानी क्लासिकल के मिक्स से हुई. इस खास प्रस्तुति में श्रीमति सुभा राजगोपालन ने कर्नाटक संगीत और श्री संजीव शुक्ला और ऐश्वर्या थपलियाल ने हिंदुस्तानी क्लासिकल की डोर संभाली. इनके सुरों को संगीत में साधने के लिए संगीत मंडली में एक से बढ़कर एक दिग्गज शामिल थे. वॉयलन पर श्री अरविंद नारायण, सारंगी पर श्री अनिल कुमार मिश्रा, तबले पर श्री मुकर्रम कादरी, मृदंग पर मास्टर अर्जुन अरविंद थे.

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संगीत के बाद हुई भगवान श्री कृष्ण की लीला
सुरों से सजी शुरुआत के बाद मंच पर थे 'कथा वाचन' के नन्हें सितारे. इन बच्चों ने कृष्ण लीलाओं में से एक गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा को कथक के जरिए दर्शकों के सामने पेश किया. छोटे-छोटे बच्चों को कला संस्कृति से जुड़ते देखना दर्शकों के लिए एक खास अनुभव था. यह परफॉर्मेंस किसी फिल्मी गाने पर नहीं बल्कि कथक की तीन ताल पर सजी पढंत पर थी जिसे खुद बच्चों की गुरु और कथा वाचन की संस्थापक भार्गवी ने गाया और बच्चों को सपोर्ट किया. गुरु शिष्य के बीच की इस ट्यूनिंग और कार्यक्रम की लय देखने लायक थी. बच्चों की इस परफॉर्मेंस को संगीत से सजाने की जिम्मेदारी संभाली श्री लावण्य अंबाडे ने. अंबाडे एक जाने माने सितार वादक हैं. मास्टर ऑफ म्यूजिक में गोल्ड मेडलिस्ट, ऑल इंडिया रेडियो ग्रेडेड आर्टिस्ट समेत तमाम उपलब्धियां उनके नाम हैं.

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संवाद के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
आर के पुरम सेक्टर पांच में तमिल संगम में हुए इस खास कार्यक्रम की आखिरी पेशकश थी एक कथक संवाद. संवाद के लिए खुद श्रीमती भार्गवी और श्रीमती रुची सैनी. लंबे अरसे से कथक की साधना कर रहीं इन दोनों कलाकारों ने पहले गुरु वंदना की इसके बाद चतुरंग और चौताल पर एक शानदार परफॉर्मेंस दी. बता दें कि सुश्री भार्गवी सुदर्शन और रुची सैनी गुरु मुन्ना शुक्ला की शिष्या रही हैं. ये कार्यक्रम उन्हीं के लिए प्रेम स्वरूप एक श्रद्धांजलि था. मुन्ना शुक्ला लखनऊ घराने के एक मशहूर कथक डांसर थे. उनका नाता बॉलीवुड में भी योगदान दे चुके बिरजु महाराज से भी था. वे उनके भांजे व शिष्य रहे और हमेशा उनकी दिखाई राह पर चले.

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