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55 साल पहले कार में फिल्माया गया चूड़ियों का ये गाना, किशोर कुमार और लता मंगेशकर की ऐसी जुगलबंदी इश्क में डूबे आशिकों का फेवरिट

गाड़ी, चूड़ियां और रोमांस....साल 1971 में आई गैम्बलर का हिट गाना. देव आनंद ने एक्ट्रेस को इंप्रेस करने के लिए अपनाए थे तमाम हथकंडे. लता मंगेशकर और किशोर कुमार की आवाज में ये गाना आज भी क्लासिक है.

55 साल पहले कार में फिल्माया गया चूड़ियों का ये गाना, किशोर कुमार और लता मंगेशकर की ऐसी जुगलबंदी इश्क में डूबे आशिकों का फेवरिट
चूड़ी नहीं ये मेरा दिल है...देव आनंद और जाहिदा का वो गाना जो आज भी रोमांटिक क्लासिक
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नई दिल्ली:

देव आनंद, राजेश खन्ना, जीतेंद्र, ऋषि कपूर, विनोद खन्ना, फारुख शेख ये उन सितारों में से हैं जिन्होंने हिंदी सिनेमा को कई हिट रोमांटिक गाने दिए हैं. उस दौर के बोलों में तो जादूई ताकत होती ही थी लेकिन कलाकार अपने अंदाज से उसे और खास बना दिया करते थे. देव आनंद को ही लीजिए उन्होंने अभी ना जाओ छोड़कर, गाता रहे मेरा दिल, खोया खोया चांद, दिल का भंवर करे पुकार, फूलों के रंग से, तेरे मेरे सपने  सब एक रंग हैं जैसे कई यादगार रोमांटिक क्लासिक दिए हैं. आज हम उन्हीं के हिट गानों में से एक की बात करने वाले हैं. ये पूरा गाना एक कार में फिल्माया गया था. एक हाथ से स्टीयरिंग तो एक हाथ में चूड़ियां लिए देव साहब ने कोस्टार जाहिदा को इम्प्रेस करने के लिए खूब पापड़ बेले थे.

कार, चूड़ियां, देव आनंद और हीरोइन

हम यहां जिस गाने की बात कर रहे हैं वह साल 1971 में आई फिल्म गैम्बलर में था. इसके गाने 'चूड़ी नहीं ये मेरा दिल है' में देव आनंद एक्ट्रेस जाहिदा के साथ कार में रोमांस फर्माते नजर आए थे. इस गाने के बोल नीरज ने लिखे थे और इसे आवाज से सजाया था किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने वहीं जिस म्यूजिक ने इस गाने को आज तक इतना यादगार बनाए रखा है वो म्यूजिक एस डी बर्मन ने दिया था.

एवरग्रीन रोमांटिक हीरो हैं देव आनंद

देव साहब ने अपने अंदाज से हमेशा दर्शकों की दिल जीता. उनकी फैन्स में लड़कियों की तादाद ज्यादा थी. यूं ही उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के पहले और सदाबहार रोमांटिक हीरो नहीं कहा जाता था. लुक से लेकर उनके बात करने का अंदाज, उनकी एनर्जी फैन्स को पसंद आती थी.

गैम्बलर की कहानी

गैम्बलर में देव आनंद लीड रोल में थे. फिल्म राजा के इर्द गिर्द घूमती है. राजा को उसकी मां ने बचपन में ही छोड़ दिया था. उसकी परवरिश करता है मास्टर (जीवन) जो चाहता है कि राजा उनसके लिए अपराध की दुनिया में काम करे. लेकिन राजा ताश के खेल की हर बारीकी सीखने के बाद उसका साथ छोड़ देता है और एक सक्सेसफुल और अमीर जुआरी बन जाता है. इसी दौरान राजा की मुलाकात चंद्रा से होती है.

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प्यार में पड़ने के बाद राजा जुर्म की दुनिया से दूर होना चाहता है लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब मास्टर का कत्ल हो जाता है और इसका इल्जाम राजा पर आता है. साल 1971 में आई ये फिल्म उस साल की बड़ी हिट थी. इंटरनेट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक इसने बॉक्स ऑफिस पर भारत में करीब 80 लाख रुपये और वर्ल्डवाइड 1.20 करोड़ की कलेक्शन की थी.

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