24 घंटे यानी पूरा एक दिन गायब रहने की कहानी की शुरुआत बांग्लादेशी एक्ट्रेस राइमा इस्लाम शिमू के घर से सुबह 7 बजे शूट के लिए 16 जनवरी 2022 को शूट के लिए निकलने से शुरु हुई. लेकिन फिर वह गायब हो गईं. फोन उठा नहीं रही थीं और कभी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंचीं. वहीं अगली सुबह दो गायब व्यक्तियों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई और फिर पुलिस को ढाका के बाहर एक पुल के पास झाड़ियों में मिला एक बोरा, जिसमें थी राइमा की लाश, जो दो टुकड़ों में कटी हुई थी. तहकीकात शुरू हुई और बांग्लादेश फिल्म इंडस्ट्री के जाने माने लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया. हालांकि एक सुराग, जिसने सब कुछ बदल कर रख दिया, जो घर के बहुत पास ही मिला था. वह परिवार की कार के अंदर ही था.
राइमा का थियेटर से बड़े पर्दे तक का सफर
राइमा इस्लाम शिमू बांग्लादेश की एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का जाना माना नाम थीं. हालांकि उनके जन्म की जानकारी अलग अलग मिली हैं. द डेली स्टार के मुताबिक उनका जन्म 1977 में हुआ. जबकि बंगाली डेली जुगंतर के मुताबिक, उनका जन्म 1987 में हुआ. राइमा ने अपने करियर की शुरुआत थियेटर से की थी. वहीं उनपर नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्ममेकर काजी हयात की नजर पड़ी और उनके टैलेंट से इम्प्रेस होकर उन्होंने 1998 में आई बर्तामन में कास्ट किया, जो उनका फिल्म डेब्यू बना. इसके बाद उनका करियर शुरू हुआ और साल 2002 तक उन्होंने 25 बांग्लादेशी फिल्मों में काम किया. राइमा थियेटर भी करती थीं और कहा जाता है कि उन्होंने करीबन 50 प्लेज में परफॉर्म किया, जिसके चलते वह टीवी का जाना माना चेहरा बन गईं. उनकी आखिरी फिल्म जमाई ससुर थी, जो 2002 में रिलीज हुई.
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राइमा की शादी के बारे में
एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में काम करने के दौरान राइमा की मुलाकात ढाका के बिजनेसमैन सखावत अली नोबेल से हुई थी. दोनों का प्यार परवान चढ़ा और 2004 में उन्होंने शादी कर ली. इसके बाद राइमा ने फिल्मों से दूरी बना ली, लेकिन टीवी के लिए काम करती रहीं. उन्होंने कई प्रोग्राम प्रोड्यूस किए और अपना प्रोडक्शन हाउस भी शुरू किया और एक प्राइवेट टीवी चैनल के मार्केटिंग डिपार्टमेंट में काम किया. कपल के दो बच्चे थे, ढाका के ग्रीन रोड इलाके में रहते थे. हालांकि इस सुखी शादीशुदा जिंदगी में असल मोड़ तब सामने आया जब जांच करने के बाद पता चला.
रविवार के दिन हुईं गायब
राइमा जिस रविवार की सुबह गायब हुईं वह 16 जनवरी, 2022 को रविवार था. सखावत के मुताबिक, राइमा सुबह करीब 7 बजे यह कहकर घर से निकलीं कि उन्हें एक शूट पर जाना है. लेकिन वह कभी वहां नहीं पहुंचीं. वहीं राइमा की बहन फातिमा निशा ने उन्हें बार-बार फोन किया तो कोई जवाब नहीं मिला. आखिर में फातिमा ने सखावत को फोन करके पूछा कि क्या उन्हें पता है कि उनकी बहन कहां है. उन्होंने बताया, "वह सुबह 7 बजे शूटिंग के लिए निकली थीं और तब से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है. वह उस शूटिंग लोकेशन पर भी नहीं पहुंचीं जहां उन्हें पहुंचना था." उस रात राइमा नहीं पहुंचीं. वहीं 17 जनवरी की सुबह फातिमा ने पुलिस में लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई. बाद में सखावत ने भी कलाबागान पुलिस स्टेशन में एक और रिपोर्ट दर्ज कराई. उस समय तक कोई लाश नहीं मिली थी. तभी केरानीगंज से एक फोन आया.
हजरतपुर ब्रिज के पास मिली एक बोरी
हजरतपुर ब्रिज के पास झाड़ियों में लोगों ने एक संदिग्ध बोरी पड़ी देखी. वहीं पुलिस को बुलाया तो बोरी खोली, तो उन्हें एक महिला की लाश मिली. लाश के दो टुकड़े किए गए थे और शरीर पर कई चोट के निशान थे. लाश को पोस्टमार्टम के लिए मिटफोर्ड अस्पताल भेजा गया. राइमा के भाई, शाहिदुल इस्लाम को लाश की पहचान करने के लिए बुलाया गया था. तलाश खत्म होने के बाद हत्या की जांच शुरू हुई. पुलिस ने राइमा के रिश्तेदारों, सहकर्मियों और उनके प्रोफेशनल जीवन से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ की. एक नाम ने तुरंत सबका ध्यान खींचा.
एक्टर जायद खान से पूछताछ
जांच के शुरुआती दौर में बांग्लादेशी एक्टर जायद खान का नाम सामने आया. खबरों के मुताबिक, बांग्लादेश फिल्म आर्टिस्ट्स एसोसिएशन की मेंबरशिप को लेकर राइमा और जायद के बीच सालों पहले झगड़ा था. जांच करने वालों ने उनसे इस झगड़े के बारे में और यह भी पूछा कि क्या हाल-फिलहाल में उनकी राइमा से कोई बातचीत हुई थी. ज़ायद ने बताया कि उन्होंने राइमा से आखिरी बार लगभग दो साल पहले बात की थी और उसके बाद से वे उनके संपर्क में नहीं थे. इस सुराग से कोई खास जानकारी नहीं मिली.
ब्लीच की गंध
फिर पूछपाछ राइमा के गायब होने से पहले मिलने वाले लोगों से हुई. इसमें सखावत और घर के नौकर शामिल थे, जिन्होंने एक ही बात दोहराई कि राइमा सुबह 7 बजे शूटिंग के लिए घर से निकली थीं. लेकिन परिवार की कार को लेकर कुछ शक पैदा हुआ, जिसका इस्तेमाल राइमा और उनके पति दोनों करते थे. जब जांच करने वालों ने गाड़ी खोली, तो उन्हें अंदर तेज गंध महसूस हुई. पुलिस को शक हुआ कि गाड़ी को साफ करने और सबूत मिटाने के लिए ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल किया गया था. फिर उन्हें नायलॉन की रस्सी का एक बंडल मिला. शक गहरा हुआ क्योंकि जिस बोरी में राइमा की लाश थी, उसे भी नायलॉन की रस्सी से ही सिला गया था. जांच करने वालों ने यह पता लगाना शुरू किया कि क्या कार में मिली चीज और बोरी पर इस्तेमाल हुई रस्सी का आपस में कोई संबंध है. यह संभावना बहुत डरावनी थी. हो सकता है कि परिवार की गाड़ी का इस्तेमाल राइमा की लाश को केरानीगंज ले जाने के लिए किया गया हो. इसी के साथ शूटिंग के लिए घर से निकलने वाली कहानी अब झूठी साबित हो रही थी.
हिरासत में 6 लोग
पुलिस ने सखावत और उनके दोस्त एसएमवाई अब्दुल्ला फरहाद समेत छह संदिग्धों को हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की. जांच करने वालों ने बताया कि सखावत ने शुरू में 16 जनवरी की सुबह हुई घटनाओं के बारे में अलग-अलग बातें बताईं. पुलिस के मुताबिक, लगातार पूछताछ के बाद उन्होंने आखिरकार अपनी पत्नी की हत्या करने की बात कबूल कर ली. जांच करने वालों का आरोप था कि राइमा कभी शूटिंग के लिए घर से निकली ही नहीं थीं.
फिर सुबह 7 बजे क्या हुआ?
पुलिस के बयान के मुताबिक, सुबह करीब 7 बजे राइमा और सखावत के बीच बहस हुई. वही समय उन्होंने बाद में दावा किया था कि राइमा घर से निकली थीं. आरोप है कि सखावत ने राइमा के साथ मारपीट की और फिर गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी. इसके बाद उन्होंने फरहाद को घर बुलाया और उसे पूरी घटना के बारे में बताया. पुलिस को बताने के बजाय, फरहाद ने कथित तौर पर हत्या को छिपाने और शव को ठिकाने लगाने में मदद की.
घर के अंदर था एक और व्यक्ति
जांचकर्ताओं के अनुसार, सखावत ने उसे नाश्ता लाने के लिए बाहर भेजा. हाउसकीपर के जाने के बाद दोनों लोगों ने कथित तौर पर राइमा के शव को टुकड़ों में काटा और अवशेषों को एक बोरी में डाला, जिसके बाद नायलॉन की रस्सी से सिलकर बंद कर दिया. फिर वे बोरी को परिवार की कार तक ले गए और उसे डिग्गी में छिपा दिया. खबरों के मुताबिक, सखावत और फरहाद उस दोपहर शव को ठिकाने लगाने के इरादे से कार लेकर निकले. लेकिन तब भी दिन का उजाला था. पकड़े जाने के डर से उन्होंने कथित तौर पर यह कोशिश छोड़ दी और बोरी को गाड़ी में ही रखकर घर लौट आए.
रात 9 बजे फिर निकले
खबरों के मुताबिक, रात करीब 9 बजे वे दोनों फिर से निकले. इस बार वह किसी सुनसान जगह की तलाश में केरानीगंज की ओर चले गए. आखिरकार वह हजरतपुर पुल के आस-पास के इलाके में पहुंचे. पुलिस के मुताबिक, पुल से लगभग 300 मीटर दूर उन्होंने बोरी को झाड़ियों में फेंक दिया और ढाका लौट आए. अगली सुबह सखावत पुलिस स्टेशन गए और अपनी पत्नी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई. तब तक स्थानीय लोगों को बोरी मिल चुकी थी.
हिंसा से भरी शादी
जब जांचकर्ताओं ने इस कपल की शादीशुदा जिंदगी की जांच की तो उन्हें उनकी गंभीर समस्याओं और आरोपों का पता चला. खबरों के मुताबिक, सखावत डिप्रेशन से जूझ रहे थे और राइमा पर बहुत ज्यादा शक करने लगे थे. आरोप है कि उन्होंने राइमा पर अफेयर के शक के कारण अक्सर उनके साथ मारपीट की. कोविड-19 महामारी ने परिवार पर और ज्यादा आर्थिक दबाव डाल दिया. शूटिंग रुकने से राइमा का टीवी का काम बंद हो गया. जबकि सखावत को अपने कारोबार में भारी नुकसान हुआ. जब काम दोबारा शुरू हुआ, तो राइमा परिवार की कमाई का मुख्य जरिया बन गईं. आर्थिक तंगी और पति-पत्नी के बीच झगड़े और बढ़ गए.
घरेलू हिंसा की दर्ज कराई थी शिकायत
मौत से कुछ महीने पहले, राइमा ने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई थी. वह अपनी शादी की समस्याओं के बारे में अपनी बहन से भी अक्सर बात करती थीं. मारपीट और नाखुशी के बावजूद, वह इस रिश्ते में बनी रहीं. हत्या के कुछ दिनों बाद, पुलिस ने राइमा और सखावत की बेटी, ओजिया अलीम रिद से पूछताछ की. खबरों के मुताबिक, उसने जांचकर्ताओं को बताया कि उसके पिता अक्सर उसकी मां के साथ मारपीट करते थे. उसके बयान में इस मामले की सबसे परेशान करने वाली जानकारी भी शामिल थी. हत्या का जुर्म कबूल करने के बाद सखावत ने पुलिस कस्टडी से अपनी बेटी को फोन किया. उसके बताए अनुसार, उन्होंने अपनी पत्नी की हत्या के लिए माफी मांगी.
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