फिल्म तहखाना (Tahkhana) साल 1986 में रिलीज हुई थी. फिल्म उस वक्त की सबसे डरावनी फिल्म थी. जिसको रामसे ब्रदर्स ने बनाया था. इस फिल्म में प्रीति सप्रू, हेमंत बिरजे जैसे तमाम बड़े एक्टर्स नजर आए थे. फिल्म 12 दिसंबर 1986 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज की गई. रामसे ब्रदर्स ने हॉरर सब्जेक्ट को एक अलग ही नाम दिया और रामसे ब्रदर को हॉरर फिल्में बनाने को लेकर जाना जाता है. इसके बाद रामसे ब्रदर्स ने बॉलीवुड में और तमाम बड़ी हॉरर फिल्में बनाई. लेकिन तहखाना ने दर्शकों के दिल में एक अलग ही छाप छोड़ी थी. वहीं फिल्म में प्रीति सप्रू (Priti Sapru) का काम भी दर्शकों को काफी पसंद आया था. प्रीति ने अपनी खूबसूरती और एक्टिंग से हर दर्शक का दिल जीता. हाल ही में प्रीति ने एनडीटीवी से बात की और पुरानी यादों को ताजा किया.
रात में शूट करते हैं हॉरर फिल्म
एक्ट्रेस प्रीती सप्रू ने कहा कि फिल्म तहखाना में काम करना मेरे लिए एक अच्छा एक्सपीरियंस रहा था. उस किरदार में ढलना, उस किरदार को फील करना, खुद को भूल जाना और उस किरदार को एडॉप्ट करना, हर एक कलाकार का काम होता है. रामसे ब्रदर्स की फिल्में मेरे पिताजी करते थे और मेरे भाई तेज सप्रू भी उनकी फिल्में कर चुके हैं. जब मुझे तहखाना ऑफर हुई थी, एक्टर हेमंत मेरे अपोजिट थे. यह मेरी पहली हॉरर फिल्म थी. मुझे शूटिंग के पल याद है कि जब एक्टर को भूत बनाते हैं, उसका मेकअप भी हमारे सामने होता था. हम ज्यादातर रात में शूट करते हैं क्योंकि भूत रातों में ही होते हैं, फिर पीछे से आपके भूत लग गया, आप भाग रहे हो, चीख रहे हो, रो रहे हो और रात में धुंध दिखती थी. मैंने इन सब चीजों को काफी एंजॉय किया था, क्योंकि मेरे लिए यह सब नया एक्सपीरियंस था.
बता दें, तहखाना 80 के दशक की सबसे डरावनी और हिट फिल्मों में से एक थी. जब यह फिल्म दर्शकों के बीच में आई थी, लोग अकेले इस फिल्म को देखना पसंद नहीं करते थे. रामसे ब्रदर्स ज्यादातर हॉरर फिल्मों को लेकर ही जाने जाते हैं. इसके अलावा प्रीति सप्रू एक और हॉरर फिल्म पुरानी हवेली में भी नजर आ चुकी हैं. इस फिल्म में उनका एक छोटा सा किरदार था. लेकिन उनके किरदार ने भी फिल्म में जान डाल दी थी. पुरानी हवेली में प्रीति एक्टर अनिल धवन के साथ नजर आई थीं. अनिल धवन भी उस दौर के एक चार्मिंग एक्टर थे.
तहखाना की कहानी
अगर फिल्म की कहानी की बात करें तो इसमें मुख्य रूप से जन्म के समय बिछड़ी हुई दो बहनों की कहानी, काला जादू जैसी चीजों पर आधारित है. इस फिल्म की शुरुआत ठाकुर सुरजीत सिंह से होती है, जिनके दो बेटे होते हैं, बड़ा बेटा रघुवीर और छोटा बेटा दुर्जन. छोटा बेटा काला जादू और बुरी ताकतों पर विश्वास करता है. इसलिए सुरजीत सिंह अपनी संपत्ति अपने बड़े बेटे को सौंप देता है और अपने छोटे बेटे की गलत हरकतों के कारण उसको अपनी जायदाद से बेदखल कर देता है. इसके बाद दुर्जन बदले की आग में जलने लगता है. अपनी बुरी शक्तियों को इस्तेमाल करके दुर्जन परिवार को परेशान करने लगता है. उससे बचने के लिए साधु संत की मदद से दुर्जन को एक गहरे तहखाने में बंद कर दिया जाता है. कुछ सालों बाद रघुवीर की दो बेटियां होती हैं सपना और आरती. दुर्जन के कारण परिवार को एक बड़ी दिक्कत से बचाने के लिए रघुवीर अपनी बड़ी बेटी को अपने विश्वास पात्र नौकर को सौंप देता है. उसकी दूसरी बेटी वहीं ठाकुर हवेली में रहती है.
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