रात का सन्नाटा, धीमी रोशनी और पुराने जमाने का रोमांस... बॉलीवुड के कुछ गाने ऐसे हैं, जो वक्त बीतने के साथ पुराने नहीं, बल्कि और ज्यादा खास लगने लगते हैं. 1967 में आई एक फिल्म का ऐसा ही नगमा आज भी अपनी रोमांटिक धुन और अंदाज से दिल छू लेता है. इसमें एक तरफ देव आनंद का बेहद आकर्षक अंदाज था, तो दूसरी तरफ तनुजा की खूबसूरती ने पर्दे पर रोमांस को अलग रंग दिया. सबसे खास थी वह आवाज, जिसने इस गाने में रात की तन्हाई और प्यार की बेचैनी को यादगार बना दिया. यह गाना था 'रात अकेली है.'
आशा भोसले की आवाज ने गाने में भरी रोमांस की मिठास
फिल्म ज्वेल थीफ का यह गाना अपने दौर के उन रोमांटिक नगमों में शामिल है, जिन्हें आज भी पुराने हिंदी सिनेमा के चाहने वाले बड़े शौक से सुनते हैं. आशा भोसले की सुरीली और दिलकश आवाज ने गाने को ऐसी पहचान दी कि इसकी धुन सुनते ही 60 के दशक का सिनेमाई रोमांस आंखों के सामने तैरने लगता है. गाने का संगीत महान संगीतकार एस.डी. बर्मन ने तैयार किया था. वहीं इसके बोल मशहूर गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे. आवाज, म्यूजिक और शब्दों के इस शानदार मेल ने इसे एक ऐसा गाना बना दिया, जिसमें रोमांस के साथ हल्की-सी कसक भी महसूस होती है. पर्दे पर देव आनंद और तनुजा की केमिस्ट्री ने इस एहसास को और मजबूत किया. देव आनंद का स्टाइल और तनुजा की अदाएं गाने के माहौल में चार चांद लगा देती हैं. यही वजह है कि दशकों बाद भी यह गाना पुराने दौर की रोमांटिक यादों को ताजा करने में कामयाब रहता है.
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ज्वेल थीफ की कहानी में भी था रहस्य और रोमांच
‘रात अकेली है' जिस फिल्म का हिस्सा था, वह सिर्फ रोमांस के लिए ही नहीं, बल्कि अपने सस्पेंस और थ्रिल के लिए भी चर्चित रही. विजय आनंद की डायरेक्शन में बनी ज्वेल थीफ में देव आनंद के साथ वैजयंतीमाला, अशोक कुमार, तनुजा, हेलेन और नजीर हुसैन जैसे कलाकार नजर आए थे. फिल्म की कहानी में पहचान, रहस्य, चोरी और रोमांच के कई दिलचस्प मोड़ देखने को मिलते हैं.
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