हिंदी सिनेमा के पुराने गाने सुनें तो हर मधुर आवाज सुनकर लगता है कि लता मंगेशकर गा रही हैं या फिर आशा भोसले गा रही हैं. पर कुछ आवाजें ऐसी भी हैं जो इन दोनों के बीच भी यादगार बनने में कामयाब हुईं. ऐसी आवाजों के गाए कुछ गीत ऐसे हैं जिनकी धुन बजते ही जैसे आंखों के सामने पुरानी शामें, रेडियो की आवाज और अपनों के साथ बिताए वो खूबसूरत पल लौट आते हैं. एक ऐसा ही पुराना गाना है. जिसे सुनकर दिल रोमांस की कुछ विंटेज गलियों में घूमने निकल जाएगा. मोहब्बत का दौर कोई भी हो- मिलेनियल हो या जैन जी हो हर जनरेशन में ये गाना खूबसूरत रोमांटिक सॉन्ग के तौर पर गुनगुनाया जाता है. लेकिन इसे गाया लता या आशा ने नहीं है.
48 साल बाद भी दिल को छू जाता है गाना
हम बात कर रहे हैं साल 1978 में आई फिल्म ‘अंखियों के झरोखों से' के टाइटल सॉन्ग की. ‘अंखियों के झरोखों से' नाम का ये गीत आज भी सुनने वालों को एक अलग ही सुकून देता है. इसकी सादगी, मीठी धुन और भावुक आवाज ऐसी है कि पहली बार सुनने पर भी दिल से जुड़ जाती है. दिलचस्प बात ये है कि बहुत से लोग आज भी इस गाने को लता मंगेशकर या आशा भोसले की आवाज मानते हैं. लेकिन इस खूबसूरत गीत को अपनी आवाज हेमलता ने दी थी. गाने का संगीत और बोल दोनों रविंद्र जैन ने तैयार किए थे. यही वजह है कि गीत में रविंद्र जैन की खास संगीत शैली और हेमलता की इमोशनल आवाज का शानदार मेल सुनाई देता है.
रविंद्र जैन और हेमलता की जोड़ी ने रचा जादू
‘अंखियों के झरोखों से' का संगीत रविंद्र जैन ने ही तैयार किया था. फिल्म में सचिन पिलगांवकर और रंजीता कौर नजर आए थे और दोनों की मासूम प्रेम कहानी ने दर्शकों का दिल जीत लिया था. फिल्म के गाने भी इसकी खूबसूरती का बड़ा हिस्सा रहे. रविंद्र जैन और हेमलता की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार गीत दिए. ‘नदिया के पार' के गानों में भी हेमलता की आवाज सुनाई दी थी. शायद यही वजह है कि उस दौर के गीतों में एक ऐसी मिठास महसूस होती है, जो आज के तेज-तर्रार संगीत के बीच भी मन को ठहरने पर मजबूर कर देती है.
ये भी पढ़ें; साउथ की वो फिल्म जिसका रीमेक है अक्षय-सैफ की हैवान, मोहनलाल ने किया है, इस ओटीटी प्लेटफॉर्म है मौजूद
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं