पुराने हिंदी सिनेमा के गानों की खासियत यही है कि उन्हें सुनते ही किसी बीते दौर की तस्वीर आंखों के सामने आ जाती है. ऐसा ही एक गाना है ‘तुमको हमारी उमर लग जाए', जो 1964 में आई फिल्म ‘आई मिलन की बेला' का हिस्सा था. लता मंगेशकर की आवाज में सजे इस गाने में सायरा बानो का खूबसूरत अंदाज नजर आता है, जबकि राजेंद्र कुमार और धर्मेंद्र पर्दे पर दिखाई देते हैं. पार्टी के माहौल में फिल्माया गया यह गीत अपनी धुन, बोल और प्रस्तुति की वजह से आज भी पुराने फिल्मी गानों के चाहने वालों को पसंद आता है.
लता की आवाज और शंकर-जयकिशन का संगीत
‘तुमको हमारी उमर लग जाए' को लता मंगेशकर ने गाया था. इसके बोल हसरत जयपुरी ने लिखे थे और संगीत की जिम्मेदारी शंकर-जयकिशन की थी. गाने के बोलों में किसी अपने के लिए लंबी उम्र की दुआ और प्यार का भाव नजर आता है. यही सादगी इसकी सबसे बड़ी खूबी है. यह गाना उस दौर की लोकप्रियता को भी दिखाता है. 1964 की बिनाका गीतमाला की वार्षिक सूची में ‘तुमको हमारी उमर लग जाए' को चौथे स्थान पर दर्ज किया गया था. इसे लता मंगेशकर ने गाया था और संगीत शंकर-जयकिशन का था.
सायरा बानो, राजेंद्र कुमार और धर्मेंद्र की तिकड़ी
‘आई मिलन की बेला' में राजेंद्र कुमार ने श्याम, सायरा बानो ने बरखा और धर्मेंद्र ने रंजीत का किरदार निभाया था. फिल्म का निर्देशन मोहन कुमार ने किया था, जबकि इसके निर्माता जे. ओम प्रकाश थे. शशिकला, नाजिर हुसैन, सुलोचना और मदन पुरी भी फिल्म की अहम स्टारकास्ट का हिस्सा थे. फिल्म की कहानी दो ऐसे दोस्तों श्याम और रंजीत के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी जिंदगी में एक ही लड़की बरखा आती है. दोनों के बीच प्यार और गलतफहमियों की वजह से कहानी में बड़ा मोड़ आता है. धर्मेंद्र का किरदार इस फिल्म में पहले के मुकाबले अलग रंग में नजर आया और फिल्म ने उनके करियर में भी खास जगह बनाई.
बॉक्स ऑफिस पर सफल रही थी फिल्म
‘आई मिलन की बेला' सिर्फ अपने गानों के लिए ही याद नहीं की जाती, बल्कि रिलीज के समय भी फिल्म को अच्छी सफलता मिली थी. फिल्म के साउंडट्रैक में ‘तुमको हमारी उमर लग जाए' के अलावा ‘ओ सनम तेरे हो गए हम', ‘तुम कमसिन हो नादान हो', ‘आहा आई मिलन की बेला' और ‘मैं प्यार का दीवाना' जैसे गाने भी थे. यानी पूरा एलबम ही उस दौर के संगीत का अच्छा उदाहरण था.
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आज 62 साल बाद भी जब ‘तुमको हमारी उमर लग जाए' बजता है, तो लता मंगेशकर की आवाज के साथ सायरा बानो का वह अंदाज और राजेंद्र कुमार-धर्मेंद्र की पर्दे पर मौजूदगी पुराने दौर की याद दिला देती है. यही वजह है कि यह गीत समय बीतने के बावजूद अपनी मिठास बनाए हुए है.
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