हिंदी सिनेमा में कई गाने बनते हैं जिसमें प्रेमी अपने प्यार का इजहार करता है. प्यार भरी बातें होती है और छेड़छाड़ होती है. कभी महबूबा चांद बनती है तो, कभी महबूब उसी चांदनी. आज हम आपको 1969 में आए एक ऐसे गाने के बारे में बताएंगे जिसमें भंवरे की गुनगुनाहट थी, फूलों की खुशबू थी और दो दिलों के बीच प्यार की खूबसूरत कहानी. पर्दे पर राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की जोड़ी ने ऐसा जादू चलाया, कि दर्शकों की नजरें उनसे हट ही नहीं पाई. खूबसूरत वादियां, बर्फीले पहाड़, फूलो के बगीचों के बीच फिल्माए इस गाने में भंवरा, कली और लफ्जों की ऐसी खूबसूरती थी कि 57 साल बाद भी ये गाना हर प्रेमी और प्रेमिका की पसंद में शामिल रहता है. इस गाने की खासियत सिर्फ इसकी धुन और रोमांस नहीं है. बल्कि इस फिल्म ने राजेश खन्ना को सुपरस्टार भी बनाया था.
भंवरे और कली के बहाने प्यार का इजहार
साल 1969 में आई फिल्म 'आराधना' जिसमें दो प्यार करने वालों के मिलने की और बिछड़ने की कहानी दिखाई गई है. ये वो दौर था जब हीरो के मर जाने पर फिल्म की कहानी आगे बढ़ती थी. रिपोर्ट्स की मानें तो उस समय ऐसा कहा जाता था कि मरने के बाद लोगों के इमोशन ज्यादा कनेक्ट होते हैं. इसलिए उस समय हीरो की मौत को अच्छी स्क्रिप्ट का हिस्सा माना जाता था. हम बात कर रहे हैं इसी फिल्म के गाने 'गुनगुना रहे हैं भंवरे, खिल रही है कली-कली' इस गाने के बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे और इसका म्यूजिक सचिन देव बर्मन ने तैयार किया था. मोहम्मद रफी और आशा भोसले की आवाजों ने इस गाने को एक प्यारी-सी बातचीत में बदल दिया. गाने में भंवरे को शरारती प्रेमी और कली को शर्माती हुई प्रेमिका के रूप में नजर आईं. गाने के बोल के साथ राजेश खन्ना का चुलबुला अंदाज और शर्मिला टैगोर के हाव-भाव ने इस रोमांटिक गीत को अमर बना दिया. गाने के बोल इस तरह हैं-
गुनगुना रहे हैं भँवरेखिल रही हैं कली कलीगुनगुना रहे हैं भँवरेखिल रही हैं कली कलीगली गलीकली कली
गुनगुना रहे हैं भँवरेखिल रही हैं कली कलीह्म्म्म आ आ आ आ
ज़रा देखो सजनबेईमान भँवरा कैसे मुसकाये
हाय कली यूँ शरमायेघूँघट में गोरी जैसे छुपं जाये
हाय ज़रा देखो सजनबेईमान भँवरा कैसे मुसकायेहाय कली यूँ शरमायेघूँघट में गोरी जैसे छुप जाये हाय
दार्जिलिंग की वादियों में हुआ शूट
फिल्म की ज्यादातर शूटिंग दार्जिलिंग में ही हुई थी. फिल्म के दूसरे गाने जैसे मेरे सपनों की रानी को दार्जिलिंग की पहाड़ियों और हिमालयन रेलवे के रास्तों पर फिल्माया गया था. वहीं गुनगुना रहे हैं भवरें का शूट भी खूबसूरत वादियों, बर्फ से ढ़के पहाड़ों और फूलों के बगीचों के बीच हुआ है. इस गाने के बोल, संगीत और शर्मिला-राजेश खन्ना के केमिस्ट्री और खूबसूरत लोकेशन ने गाने को अमर बना दिया. फिल्म के बाकी गीतों को भी बेहद पसंद किया है. फिल्म के दूसरे गाने भी खूब पसंद किए गए, जैसे मेरे सपनों की रानी, रूप तेरा मस्ताना, कोरा कागज था ये मन मेरा गाना भी काफी पसंद किया गया. इस फिल्म को राजेश खन्ना के करियर की सबसे सफल फिल्मों और उनको सुपरस्टार बनाने के लिए भी जाना जाता है.
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आराधना ने राजेश खन्ना को बनाया सुपरस्टार
फिल्म आराधना को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पांस मिला. शक्ति सामंत के डायरेक्शन में बनी फिल्म में राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर के अलावा सुजीत कुमार, फरीदा जलाल और अभि भट्टाचार्य जैसे कलाकार भी नजर आए. फिल्म की कहानी वंदना और अरुण के प्यार, अरुण की मौत और वंदना के जीवन के संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमती है. इसमें राजेश खन्ना ने पिता और बेटे, दोनों की रोल प्ले करते हुए, डबल रोल निभाया था. फिल्म सिर्फ हिंदी भाषा वाले इलाकों में ही नहीं, बल्कि देश के दूसरे हिस्सों में भी खूब पसंद कि गई. भारत के नॉर्थ और साउथ के कुछ राज्यों में ये फिल्म 100 दिनों कर लगातार चली और हर दिन इसके 4 शो होते थे. साउथ की बात करें तो वहां पर इस फिल्म को इतना पसंद किया गया कि, ये 3 साल तक थिएटर्स में लगी रही. पूरे देश में 'आराधना' बड़ी हिट साबित हुई और इसे प्लैटिनम जुबली हिट का दर्जा मिला.
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