‘सैंया ले गई जिया तेरी पहली नजर' गाने में साधना और संजय खान की जोड़ी नजर आई थी. गाने के बोल प्यार में पड़ने के बाद दिल में उठने वाली भावनाओं को बयां करते हैं. पहली मुलाकात, आंखों की शरारत और किसी के करीब आने की चाह को इस गीत में खूबसूरती से पिरोया गया है. आशा भोसले की आवाज ने इसके रोमांटिक एहसास को और भी खास बना दिया. संगीतकार रवि ने धुन को ऐसा अंदाज दिया कि गाना सुनने वाले इसके साथ आसानी से जुड़ जाते हैं. फिल्म के संगीत में प्रेम धवन और राजकवि इंद्रजीत सिंह तुलसी समेत अन्य गीतकारों का योगदान था. यह गीत फिल्म के लोकप्रिय रोमांटिक गानों में शामिल है.
क्या थी ‘एक फूल दो माली' की कहानी?
देवेंद्र गोयल के निर्देशन में बनी ‘एक फूल दो माली' सिर्फ रोमांस की कहानी नहीं थी, बल्कि त्याग, रिश्तों और पिता के प्यार को भी दिखाती थी. फिल्म में साधना ने सोमना, संजय खान ने अमर कुमार और बलराज साहनी ने कैलाश नाथ कौशल का किरदार निभाया था. दुर्गा खोटे और डेविड अब्राहम भी फिल्म का हिस्सा थे.
कहानी सोमना से शुरू होती है, जो अपनी मां लीला के साथ पहाड़ी इलाके में रहती है और सेब के बागान में काम करती है. इसी दौरान उसकी मुलाकात अमर से होती है. दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगते हैं और शादी करने का फैसला करते हैं. लेकिन अमर के पर्वतारोहण अभियान के दौरान हिमस्खलन की खबर आती है और उसे मृत मान लिया जाता है. इसके बाद सोमना की जिंदगी में कई मुश्किलें आती हैं. कैलाश उसकी मदद के लिए आगे आते हैं और उससे शादी कर लेते हैं. सोमना एक बेटे को जन्म देती है, जिसका नाम बॉबी रखा जाता है. कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है, जब कई साल बाद अमर वापस लौट आता है. इसके बाद रिश्तों के बीच भावनात्मक संघर्ष शुरू हो जाता है.
बॉक्स ऑफिस पर भी सफल रही थी फिल्म
‘एक फूल दो माली' 7 मई, 1969 को रिलीज हुई थी. फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला और यह उस साल की बड़ी हिट फिल्मों में शामिल रही. विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह 1969 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्मों में से एक थी. फिल्म की कहानी के साथ-साथ इसके गानों ने भी लोकप्रियता हासिल की.
गाना सुनने के लिए यहां क्लिक करें
फिल्म का संगीत रवि ने तैयार किया था. ‘सैंया ले गई जिया तेरी पहली नजर' के अलावा इसके संगीत को भी खूब पसंद किया गया. आशा भोसले की आवाज में सजा यह गाना आज भी पुराने हिंदी फिल्मी गीतों की चर्चा में अपनी जगह बनाए हुए है. साधना और संजय खान की पर्दे पर दिखाई गई केमिस्ट्री ने इसे यादगार बनाने में अहम भूमिका निभाई. यही वजह है कि 57 साल बाद भी यह गीत सुनने वालों को पुराने दौर के रोमांस की याद दिलाता है.
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