ऋषि कपूर के क्लासिक गानों की बात होती है तो उनकी डेब्यू फिल्म के गाने जरूर याद आते हैं. मैं शायर तो नहीं...अंखियों को रहने दे....हम तुम एक कमरे में बंद हो...और झूठ बोले कौवा काटे ये सभी गाने ऐसे हैं जो आज भी रेडियो पर बजते हैं और इन्हें खूब पसंद भी किया जाता है. आज हम आपको इसी फिल्म के एक गाने से जुड़ा दिलचस्प फैक्ट बताने जा रहे हैं कि आखिर ये गाना आया कहां से? इसकी उपज कहां से हुई और आइडिया कहां से आया?
गाने के पीछे है बुंदेलखंड की दिलचस्प कहानी
'झूठ बोले कौआ काटे...काले कौए से डरियो' ये गाना आपने ना जाने कितनी बार गाया होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये गाना बुंदेलखंड की एक कहानी से जुड़ा है और लंबे समय से मध्य प्रदेश के लोकगीतों का हिस्सा रहा है. चलिए बताते हैं कि ये एक कहानी बॉलीवुड का हिट गाना कैसे बन गई.
मध्यप्रदेश की मिट्टी अपने लोकगीतों, कहानियों और कहावतों के लिए जानी जाती है. ऋषि कपूर की डेब्यू फिल्म का हिट गाना भी वहीं से निकला है. बुंदेलखंड में एक कहानी बड़ी मशहूर है कि एक गांव में एक काला कौआ रहता था. ये कौआ मामूली नहीं था इसके बाद एक दिव्य शक्ति थी. यह झूठ और सच का पता आसानी से लगा लेता था. बताया जाता बै कि जब भी कोई शख्स झूठ बोलता तो कौआ उसे काट लेता था और इससे शरीर पर निशान बन जाता था. इससे पता चलता था कि वह कितना बड़ा झूठ बोल रहा है.
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इसी कौए की कहानी से कहावत बनी 'झूठ बोले कौआ काटे' और धीरे धीरे महिलाओं और गायकों ने इसे अपने गानों का हिस्सा बना लिया. 1973 में राज कपूर ने इस गाने को बॉबी के लिए चुना और ये काफी पसंद किया गया. गाने के बोल आनंद बख्शी ने फिल्म की जरूरत के हिसाब से लिखे. इसे गाने की जिम्मेदारी लता मंगेशकर और शैलेंद्र सिंह ने आवाज संभाली थी.
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