49 साल पहले दंगल नाम की एक फिल्म रिलीज हुई थी. इस फिल्म ने कई रिकॉर्ड बनाए. ये ना सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई करने वाली फिल्म थी, बल्कि इस फिल्म के गाने भी सुपरहिट रहे थे. ऐसे गाने जो आज भी लगभग पांच दशक बाद याद किए जाते हैं. भोजपुरी सिनेमा की बात करें तो 1977 में रिलीज हुई फिल्म 'दंगल' का नाम सबसे आगे आता है. यह भोजपुरी की पहली रंगीन फिल्म थी, जिसने इंडस्ट्री को नई दिशा दी. लेकिन फिल्म को असली लोकप्रियता दिलाने वाला था उसका संगीत, नदीम-श्रवण की पहली फिल्म. खास तौर पर मन्ना डे की आवाज में गाया गया गाना 'काशी हिले पटना हिले, कलकत्ता हिलेला' आज भी दिलों पर राज करता है.
49 साल बीत गए, फिर भी यह गाना यूट्यूब पर लाखों व्यूज हासिल कर चुका है और पुरानी यादों को ताजा कर देता है.
'दंगल' का निर्देशन रती कुमार ने किया था, जबकि निर्माता थे बचुभाई शाह. मुख्य भूमिकाओं में सुजीत कुमार और प्रेमा नारायण नजर आए. साथ में इफ्तेखार, राम सिन्हा, उर्मिला भट्ट, हरि शुक्ला और शुभा खोटे ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. ये वो दौर था जब भोजपुरी सिनेमा में कुछ खास हगो नहीं रहा था. 1969 से 1976 के बीच सिर्फ एक फिल्म रिलीज हुई थी. ऐसे में 'दंगल' ने रंगीन तस्वीरों और जीवंत संगीत के साथ नया अध्याय लिखा.
'काशी हिले पटना हिले, कलकत्ता हिलेला' गाने की कहानी काफी दिलचस्प है. यह लोकगीत 'आरा हिले, छपरा हिले, बलिया हिलेला' का रूपांतरण है. नदीम अख्तर सैफी और श्रवण कुमार राठौड़ की जोड़ी ने इस फिल्म से अपना फिल्मी सफर शुरू किया. यह उनका पहला काम था और हिट साबित हुआ. गाने के बोल राजपति ने लिखे. मन्ना डे की गहरी, भावपूर्ण आवाज ने इसे कालजयी बना दिया. इस फिल्म के कई दूसरे गाने जैसे आशा भोसले का 'मोरे होंठवा से नथुनिया', मोहम्मद रफी और आशा भोसले का 'फूट गईले किसमतिया', तथा 'फूलवा की बेनी से' भी हिट रहे.
'काशी हिले पटना हिले' सॉन्ग का फुल वीडियो यहां देखें
'दंगल' सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भोजपुरी सिनेमा का अहम दस्तावेज है. 49 साल बाद भी जब 'काशी हिले पटना हिले' बजता है, तो लगता है जैसे पुराना जमाना वापस आ गया हो, तांगे की घंटी, पनिहारिन की हंसी और दिल्लगी भरी बातें.
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