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44 साल पुराना गाना, मजरूह सुल्तान पुरी के ठेठ देसी बोल, आशा भोसले की आवाज, गोटेदार लहंगा बन गया था सबका फेवरेट

साल 1982 में राजेश खन्ना की एक फिल्म आई थी. इस फिल्म में रीना रॉय और काका पर एक हिट गाना फिल्माया गया था. इस गाने का देसी अंदाज फैन्स को खूब पसंद आया था.

44 साल पुराना गाना, मजरूह सुल्तान पुरी के ठेठ देसी बोल, आशा भोसले की आवाज, गोटेदार लहंगा बन गया था सबका फेवरेट
राजेश खन्ना और रीना रॉय का 'ये गोटेदार लहंगा' आज भी सुपरहिट
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नई दिल्ली:

हिंदी फिल्मों लोकगीत की झलक कई बार देखने को मिली है. इन्हें फिल्मों में अलग अलग तरह से पेश किया गया गया है. कई बार म्यूजिक इस तरह का रहा तो कभी बोल ऐसे रहे जो ठेठ देसी अंदाज और मेलों की याद दिालाता है. आज हम आपको राजेश खन्ना की फिल्म के एक ऐसे ही गाने के बारे में बताने जा रहे हैं. ये गाना अपने फोल्क बीट और रिदम के लिए खूब पसंद किया गया. ऊपर से बोल भी ऐसे थे जो सुनते ही जुबान पर चढ़ जाएं.

रीना रॉय के शरराती अंदाज ने गाने को बना दिया हिट

हम जिस गाने की बात कर रहे हैं वह  राजेश खन्ना की फिल्म धर्मकांटा में आया था. इस गाने के बोल थे 'ये गोटेदार लहंगा निकलूं जब डाल के'. इस गाने में रीना रॉय गुलाबी रंग के लहंगे में बिजलियां गिराती नजर आई थीं. वहीं इस गाने को अपनी आवाज से यादगार बना गए आशा भोसले और मोहम्मद रफी. इस गाने का म्यूजिक नौशाद ने दिया था और गाने के कालजयी बोल मजरूह सुल्तान पुरी ने लिखे थे. मजरूह ने हिंदी फिल्मों में कई जबरदस्त गाने दिए हैं. उनकी कलम से आए नगीनों में पहला नशा, बाहों में चले आओ, है अपना दिल तो आवारा, रात कली एक ख्वाब में आई, चुरा लिया है तुमने जो दिल को शामिल हैं. 

1982 की सिल्वर जुबली थी धर्म कांटा

सुल्तान अहमद के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में राजकुमार, राजेश खन्ना, जीतेंद्र, वहीदा रहमान, अमजद खान, रीना रॉय जैसे नामी सितारे शामिल थे. 13 अगस्त 1982 को रिलीज हुई इस फिल्म ने उस वक्त 3 करोड़ रुपये की कमाई की थी. इसे उस साल की हिट फिल्मों में से एक माना गया था. फिल्म की कहानी में ठाकुर भवानी सिंह (राजकुमार) इलाके का एक खूंखार और ताकतवर डकैत है. एक बार वह हरनाम के बच्चे को किडनैप कर लेता है और फिरौती मांगता है. फिरौती मिलने के बाद किसी दुर्घटना में उस बच्चे की मौत हो जाती है. बच्चे की मां इस दुख से टूट जाती है और भवानी सिंह को विनाश और बर्बाद होने बद्दुआ देती है. कुछ ही समय बाद एक भयंकर बाढ़ आती है, जिसमें भवानी सिंह का पूरा परिवार और उसके बच्चे उससे बिछड़ जाते हैं. उसका बेटा राम (राजेश Khanna) और लक्ष्मण (जितेंद्र) और बेटी अलग-अलग रास्तों पर चले जाते हैं.

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भवानी सिंह के दोनों बेटे बड़े होकर अलग-अलग जिंदगियां जीते हैं और उसकी बेटी उसी परिवार में पलती है जिसे भवानी ने कभी नुकसान पहुंचाया था. भवानी सिंह अपने पापों का प्रायश्चित करता है और कानून के सामने सरेंडर कर देता है. जेल से छूटने के बाद वह अपने बिखरे हुए परिवार और अपने कर्मों के न्याय यानी "धर्म कांटे" के सामने जिंदगी के असली इम्तिहान का सामना करता है.

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