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हर मां की लोरी में बसा है नंदलाला का 41 साल पुराना ये गाना, जया प्रदा की आंखों में दिखा मां यशोदा जैसा दर्द, लता मंगेशकर की आवाज़ ने किया अमर

हिंदी सिनेमा में मां और बच्चे के प्यार पर कई फिल्में बनी हैं और कई गाने भी आए हैं. आज हम बात करेंगे 41 साल पुराने गाने की जो आज भी हर मां लोरी के तौर पर अपने बच्चे के लिए गाती है.

हर मां की लोरी में बसा है नंदलाला का 41 साल पुराना ये गाना, जया प्रदा की आंखों में दिखा मां यशोदा जैसा दर्द, लता मंगेशकर की आवाज़ ने किया अमर
41 साल पुराना गाना, जो आज भी हर मां अपने बच्चे के लिए गाती है
नई दिल्ली:

बॉलीवुड में कई गाने ऐसे होते हैं जो सिर्फ एक संगीत नहीं, बल्कि भावनाओं से भी भरे हुए होते हैं. गाने के बोल और उसके पीछे छिपी भावनाएं सालों बाद भी लोगों के दिलों में वही जगह बनाए रखते हैं. आज हम एक ऐसे ही गाने की बात करेंगे जो साल 1985 में रिलीज हुई फिल्म संजोग का था. इस गाने में मां का दर्द झलकता है, जो अपने बच्चे को खोने के बाद भी उसके ना रहने का दर्द संभाल नहीं पाती है. इस गाने को आए हुए चार दशक बीत गए हैं, लेकिन आज भी ये गीत मां और बच्चे के रिश्ते को दर्शाता है. सालों बाद भी हर मां अपने बच्चे को सुलाने के लिए इसे लोरी के तौर पर गाती है. 

41 साल से मां की लोरी बना है ये गाना

हम बात कर रहे हैं साल 1985 में आई फिल्म संजोग की, जिसनें जया प्रदा और जीतेंद्र ने अभिनय किया था. फिल्म में जया प्रदा ने डबल रोल प्ले किया था. फिल्म की कहानी मां और बच्चे के प्यार के ईर्द-गिर्द घूमती दिखती है. इस फिल्म का गाना 'यशोदा का नंदलाला' इस फिल्म का ऐसा गाना है, जो 41 साल बाद भी हर मां की लोरी मे अपनी जगह बनाए हुए है. लता मंगेशकर की कोयल जैसी आवाज, जया प्रदा का मार्मिक अभिनय और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत और अनजान के बोल ने इस गीत को आज भी खास बनाए रखा है. 

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41 साल बाद भी नहीं फीकी पड़ी गीत की लोकप्रियता

'यशोदा का नंदलाला' उन हिंदी फिल्म के गानों में से एक है जो कई पीढ़ियों से हर मां अपने बच्चे के लिए गाती है. यह सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं है बल्कि मां के प्रेम का प्रतीक भी बन चुका है. कई घरों में आज भी यह गीत लोरी की तरह बच्चों को सुनाया जाता है. इसके बोल और संगीत कृष्ण और मां यशोदा के प्रेम से जोड़ता है. 

जया प्रदा का अभिनय, लता मंगेशकर की आवाज वे बनाया अमर

फिल्म संजोग का ये गाना जया प्रदा पर फिल्माया गया था. उनकी आंखों में दिखने वाला दर्द और अपनेपन ने दर्शकों को इमोशनल कर दिया था. यही वजह है कि इस गाने को सिर्फ सुना नहीं जाता है, बल्कि महसूस भी किया जाता है. स्वर कोकिला लता मंगेशकर की जादुई आवाज से इस गाने को अमर बना दिया. इस गाने के बोल अनजान ने लिखे उन्होंने मां और बच्चे के रिश्ते को बेहद सरल लेकिन असरदार शब्दों में पिरोया और मशहूर जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने इस गाने की जो धुन तैयार की वो सीधे दिल में उतर जाती है. गीत के बोल, संगीत और गायन इस गीत को कालजयी बनाता है.

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