दिवाली के मौके पर श्रीराम के अयोध्या आगमन की खुशियां मनाई जाती हैं. श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद घर लौटे थे. इस दिन को पूरे अयोध्यावासियों से हर्षोउल्लास से मनाया था. पूरी नगरी को फूलों और दीपों से सजाया था. इसी दिन को दीपावली के तौर पर मनाया जाता है. इस मौके पर आज लिए चलते हैं आपको दूरदर्शन के दौर में जब टीवी पर रामायण का आना भी किसी त्योहार से कम नहीं था. इस शो के खास एपिसोड में एक सीता और राम के विवाह का भी एपिसोड था. इस एपिसोड को क्लासिक बना गया एक गाना जिसने इसे यादगार बना दिया और आज तक इसके जोड़ का कोई दूसरा गाना नहीं आया है.
ये गीत था 'श्री रघुवर कोमल कमल नयन को पहनाओ जयमाला'. रामायण का वह पावन गीत श्री राम और माता सीता के विवाह के जयमाला प्रसंग को जीवंत कर देता है. यह गीत रवींद्र जैन ने लिखा था. उन्होंने ही इसे म्यूजिक से सजाया और फिर टीम के साथ मिलकर गाया था. रविंद्र जैन को अकेले ही म्यूजिक की कमान संभालने के लिए जाना जाता था. ना केवल वो लिखते, बल्कि म्यूजिक देने का काम करते और गाकर उसमें चांर चांद लगाने का काम भी बखूबी जानते थे. रविंद्र जैन ने अपने म्यूजिकि से रामानंद सागर के टीवी सीरियल रामायण को अमर कर दिया. रामायण का यही गीत सीता स्वयंवर के उस पल को दिखाता है जब श्री राम शिवधनुष तोड़कर जीत हासिल करते हैं और माता सीता उन्हें जयमाला पहनाने आगे बढ़ती हैं.
गीत की कहानी और भाव
जनकपुर में स्वयंवर का मंडप सजा हुआ है. राजा जनक की शर्त पूरी हो चुकी है – श्री राम ने वह धनुष तोड़ दिया है जिसे कोई हिला भी नहीं पाया था. पूरे नगर में आनंद की लहर दौड़ गई है. सखियां और माता सीता को लेकर श्री राम के पास आती हैं. इस पर बैग्राउंड में गीत इस सीन को और मनमोहक बना देता है.
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