5 नवंबर 1999 को रिलीज हुई हम साथ-साथ हैं आज भी उन फिल्मों में गिनी जाती है, जिनकी कहानी से ज्यादा उनके रिश्ते याद रह जाते हैं. सूरज बड़जात्या की इस फिल्म में एक बड़ा संयुक्त परिवार है, जिसमें मां-बाप, तीन बेटे, बेटी और उनकी जिंदगी में आने वाले नए रिश्ते हैं. फिल्म की खासियत सिर्फ सलमान खान, सैफ अली खान, तब्बू, करिश्मा कपूर और सोनाली बेंद्रे जैसे सितारे नहीं थे, बल्कि इसके गाने भी थे, जो परिवार के हर मौके के लिए जैसे अलग-अलग इमोशंस लेकर आए थे.
20 से ज्यादा सितारों की फौज, फिर भी कहानी रिश्तों की
फिल्म में मोहनिश बहल ने विवेक, सलमान खान ने प्रेम और सैफ अली खान ने विनोद का किरदार निभाया. तब्बू, सोनाली बेंद्रे और करिश्मा कपूर उनके साथ नजर आईं. इनके अलावा रिमा लागू, आलोक नाथ, नीलम कोठारी और महेश ठाकुर जैसे कलाकारों ने भी परिवार को पूरा किया. IMDb की कास्ट लिस्ट में 44 कलाकार दर्ज हैं, हालांकि इनमें कुछ छोटे और बिना क्रेडिट वाले रोल भी शामिल हैं. यही वजह है कि फिल्म का परिवार बड़ा लगने के बावजूद कहानी का केंद्र रिश्ते ही बने रहते हैं.
गाने, जो हर रिश्ते और हर मौके के लिए बने
फिल्म का संगीत रामलक्ष्मण यानी विजय पाटिल ने दिया था. इसके गानों में ‘मैय्या यशोदा', ‘ये तो सच है कि भगवान है', ‘चोटा सा साजन', ‘म्हारे हिवड़ा में नाचे मोर', ‘सुनो जी दुल्हन' और ‘एबीसीडी आई लव यू' जैसे गीत शामिल हैं. ‘मैय्या यशोदा' मां-बेटी के रिश्ते की मिठास लेकर आता है, तो ‘ये तो सच है कि भगवान है' माता-पिता के सम्मान और उनके प्रति कृतज्ञता को सामने रखता है.
वहीं ‘छोटे छोटे भाइयों' और ‘सुनो जी दुल्हन' शादी के माहौल को यादगार बनाते हैं, जबकि ‘म्हारे हिवड़ा में नाचे मोर' परिवार के उत्सव और साथ होने की खुशी को दिखाता है. फिल्म का संगीत इसलिए भी खास है क्योंकि यह सिर्फ रोमांस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार के अलग-अलग रिश्तों को आवाज देता है.
बॉक्स ऑफिस पर भी रही बड़ी कामयाबी
IMDb पर उपलब्ध बॉक्स ऑफिस जानकारी के मुताबिक फिल्म ने अमेरिका और कनाडा में 20,05,094 डॉलर की ग्रॉस कमाई की थी. भारत में फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रिलीज के बाद भी इसके गाने और फैमिली सीन लगातार याद किए जाते रहे. आज 27 साल बाद भी ‘हम साथ-साथ हैं' की सबसे बड़ी ताकत उसका यही संदेश है कि परिवार सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुख में खड़े रहने का रिश्ता है. यही वजह है कि यह फिल्म आज भी त्योहारों, पारिवारिक मिलन और पुराने हिंदी सिनेमा की यादों में अपनी जगह बनाए हुए है.
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