90 के दशक में गोविंदा के हर लड़की-लड़के के फेवरेट स्टार थे. उनके डांस और गाने को सभी आंख बंद करके फॉलो किया करते थे. 90 के दशक में गोविंदा के कई गाने सुपरहिट हुए. लेकिन एक गाना ऐसा था जो काफी हिट हुआ और लोगों के दिलों को जीता.लेकिन इस गाने ने लोगों को गलत बातें सिखाईं. गाने के बोल ऐसे थे कि कोई भी वो काम नहीं करना चाहेगा. लेकिन बच्चे गोविंदा के इस गाने के फैन बन गए थे. इस गाने का नाम 'मेरी मर्जी' है जो साल 1995 में आई फिल्म गैंबलर का है.
बच्चों को भाया गोविंदा का गाना
गोविंदा के ठुमकों और अनु मलिक के म्यूजिक ने 'मेरी मर्जी' को कल्ट स्टेटस दे दिया. 1995 की फिल्म गैंबलर से निकला यह गाना देवांग पटेल की आवाज में गाया गया. लिरिक्स विनय दावे के थे.'मेरी मर्जी' गाने में गोविंदा अपनी मर्जी से कुछ भी करने का अधिकार जताते हैं. वह कहते हैं- 'गोरे को काला कहना, नदी को नाला बुलाना, नकली नोट छापना, अस्पताल में चिल्लाना.' ये सारी 'गलत' बातें बच्चों को बहुत भा गईं. गोविंदा का एनर्जी भरा डांस और मजेदार बीट ने इस गाने को यादगार बना दिया.
फिल्म के बारे में
फिल्म 'मेरी मर्जी' 8 दिसंबर 1995 को रिलीज हुई. इसमें गोविंदा इंस्पेक्टर दयाशंकर पांडे, शिल्पा शेट्टी और आदित्य पंचोली मुख्य भूमिका में थे. निर्देशक दयाल निहलानी थे. बजट करीब 5.50 करोड़ था. बॉक्स ऑफिस पर फिल्म फ्लॉप रही. भारत में नेट कलेक्शन लगभग 7.17 करोड़ और वर्ल्डवाइड करीब 12 करोड़ रहा. लेकिन गाने ने अलग पहचान बनाई.
गाने के बोल सीधे-सीधे नियमों को तोड़ने वाले थे. 'मैं चाहे ये करूं, मैं चाहे वो करूं' जैसे डायलॉग बच्चों को फ्रीडम का मजा सिखाते थे. विनय दावे के लिरिक्स में हास्य और बेतुकापन था, जो 90 के दशक के बच्चों में पॉपुलर हो गया. देवांग पटेल की रैप जैसी डिलीवरी ने इसे और मजेदार बना दिया. Gen-Z आज भी इस गाने को याद करती हैं. गोविंदा के सिग्नेचर स्टेप्स और एनर्जी ने गाने को स्क्रीन पर जिंदा कर दिया. अनु मलिक का कंपोजिशन कैची था.
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