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विभाजन का दर्द हो या इमरजेंसी का अंधेरा, राही मासूम रजा ने अपनी कलम से दर्ज किया इतिहास
जब 1947 में देश बंटा तो राही ने देखा कि कैसे एक दिन तक साथ हंसने-बोलने वाले लोग अगले दिन शक की निगाह से एक-दूसरे को देखने लगे. राजनीति ने नारे दिए और मोहल्लों ने दरवाजे बंद कर लिए.
- अगस्त 15, 2026 16:28 pm IST
- Written by: Asif Azmi