'दलाल' कहने पर भड़का था पाकिस्तान, अब ईरान युद्ध के बीच 1.2 अरब डॉलर की कर ली 'डील'

आईएमएफ के प्रतिनिधिमंडल ने 25 फरवरी से दो मार्च तक कराची और इस्लामाबाद में पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ बातचीत की थी, लेकिन उस समय कोई समझौता नहीं हो पाया था. इसके बाद बातचीत ऑनलाइन जारी रही और अंत में मुद्राकोष के अधिकारियों और सरकार के बीच सहमति बन गई.

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पाकिस्तान किसी देश की मुश्किल स्थिति में भी उससे लाभ उठाने की पूरी कोशिश करता है.
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  • पाकिस्तान ईरान और अन्य देशों के बीच तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता का प्रयास कर रहा है
  • पाकिस्तान में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति खराब है
  • आईएमएफ ने पाकिस्तान के साथ 1.2 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता के लिए समझौता किया है
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ईरान पर हमला हुआ तो कुछ दिनों तक पाकिस्तान चुप्पी साधे रहा. मगर धीरे-धीरे उसके मध्यस्थ बनने की बात सामने आने लगी. हालांकि पाकिस्तान खुद अफगानिस्तान के साथ खुद अपने झगड़े नहीं सुलझा पा रहा है. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से जब पाकिस्तान के मध्यस्थता करने पर सवाल पूछे गए तो उन्होंने उसके लिए अप्रत्यक्ष रूप से 'दलाल' शब्द का इस्तेमाल किया था. इस पर पाकिस्तान में खूब बवाल मचा. तब लगा शायद मुस्लिम ब्रदरहुड पाकिस्तान का जाग गया हो और उसका मध्यस्थ बनना सिर्फ ईरान युद्ध को रोकना है. मगर पाकिस्तान तो पाकिस्तान है, उसने ईरान युद्ध में भी अपना फायदा निकाल लिया. इस बीच खबर है कि पाकिस्तान में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. स्थानीय मीडिया के अनुसार, 11.67 किलोग्राम सिलेंडर का दाम 3,150-3,968 रुपये से बढ़कर 3,900-5,135 रुपये हो गया है.

तीन देशों के विदेश मंत्री आ रहे

शनिवार को जारी एक प्रेस रिलीज में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री इशाक डार के बुलावे पर सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद, तुर्की के विदेश मंत्री हकन फिदान और मिस्र के विदेश मंत्री डॉ. बद्र अब्देलती 29 मार्च से 30 मार्च तक इस्लामाबाद आएंगे. विदेश मंत्रालय ने कहा, "इस दौरे पर विदेश मंत्री कई मुद्दों पर गहरी बातचीत करेंगे, जिसमें इलाके में तनाव कम करने की कोशिशें भी शामिल हैं. इसके साथ ही सभी देशों के मंत्री पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मिलेंगे.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, “पाकिस्तान सऊदी अरब, तुर्किए और मिस्र जैसे भाईचारे वाले देशों के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देता है. यह दौरा आपसी हितों के कई क्षेत्रों में इन देशों के साथ पाकिस्तान के सहयोग और तालमेल को और मजबूत करने का मौका देगा.” पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट डॉन के अनुसार, यह बातचीत पहले तुर्की में होने वाली थी, हालांकि बाद में बैठक इस्लामाबाद में आयोजित करने पर मुहर लगी.

शहबाज ने पेजेश्कियन से बात की

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बातचीत की और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के संबंध में चर्चा की. उन्होंने तेहरान पर इजराइल के लगातार हमलों की निंदा की. प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, ‘‘एक घंटे से अधिक समय तक विस्तृत बातचीत के दौरान, दोनों नेताओं ने क्षेत्र में जारी संघर्ष और शांति प्रयासों के संबंध में व्यापक चर्चा की.'' शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति को अपने, उप प्रधानमंत्री इशहाक डार और फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर द्वारा किए जा रहे कूटनीतिक प्रयासों के बारे में जानकारी दी. बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान शांति वार्ता के लिए अनुकूल माहौल बनाने को लेकर अमेरिका, खाड़ी देशों और इस्लामी देशों से बातचीत कर रहा है.

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इजरायल की निंदा

प्रधानमंत्री शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति को पाकिस्तान की शांति पहल के प्रति मजबूत समर्थन के बारे में जानकारी दी और आशा जताई कि संघर्ष को समाप्त करने का सामूहिक रूप से एक व्यवहार्य मार्ग खोजा जा सकता है. शरीफ ने नागरिक ढांचों पर हालिया हमलों समेत ईरान पर इजरायल के जारी हमलों को लेकर पाकिस्तान की कड़ी निंदा दोहराई. उन्होंने ‘‘कठिन वक्त में ईरान के बहादुर लोगों के प्रति पाकिस्तान की एकजुटता और समर्थन'' को फिर से दोहराया, साथ ही 1,900 से अधिक लोगों की मौत पर संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की.

तो कैसे उठाया पाकिस्तान ने फायदा

यहां तक तो पाकिस्तान की खबरें जानकर आपको लग रहा होगा कि पाकिस्तान तो सही में लग रहा है ईरान का हमदर्द बनकर उभरा है. मगर आज ही एक और खबर आई कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने दो अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत लगभग 1.2 अरब डॉलर के लिए पाकिस्तान से एक शुरुआती समझौता किया है. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने शनिवार को बताया कि दोनों पक्षों ने विस्तारित कोष सुविधा (ईएफएफ) की तीसरी समीक्षा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और अन्य पर्यावरण अनुकूल पहल ( रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी) से जुड़ी सुविधा के तहत दूसरी समीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न कर ली है.

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आईएमएफ के प्रतिनिधिमंडल ने 25 फरवरी से दो मार्च तक कराची और इस्लामाबाद में पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ बातचीत की थी, लेकिन उस समय कोई समझौता नहीं हो पाया था. इसके बाद बातचीत ऑनलाइन जारी रही और अंत में मुद्राकोष के अधिकारियों और सरकार के बीच सहमति बन गई. मतलब जैसे ही युद्ध फंसने लगा पाकिस्तान अमेरिका से संपर्क करने लगा और अमेरिका के युद्ध रुकवाने की योजना देखकर बीच में मध्यस्थ बन गया. इसके बदले में आईएमएफ से उसे 1.2 अरब डॉलर का फायदा मिल गया. इस संस्था पर अमेरिका का ही प्रभुत्व है.

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