तीन तलाक़ की संवैधानिक वैधता का जो मुद्दा है वो यूनिफॉर्म सिविल कोड से अलग है. संविधान निर्माताओं ने उम्मीद जताई थी कि नीति निर्देशक सिद्धांतों के तहत राज्य यूनिफॉर्म सिविल लॉ बनाने की कोशिश करेगा. कई मौकों पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस पर राय मांगी है. सरकार ने बार-बार अदालतों और संसद से कहा है कि पर्सनल लॉ में अमूमन कोई भी बदलाव सभी पक्षों के साथ विचार विमर्श के बाद ही होते रहे हैं.