संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी हफ्ते में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध और गहरा गया है. 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के संवेदनशील मुद्दे पर सरकार आखिरकार चर्चा के लिए राजी हो गई है. संसदीय कार्य मंत्री ने सदन में स्पष्ट घोषणा की कि गृहमंत्री अमित शाह इस पूरे मामले पर सदन के पटल पर विस्तार से जवाब देने के लिए तैयार हैं. लोकसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, कांग्रेस और डीएमके (DMK) सहित तमाम विपक्षी दलों से सदन को व्यवस्थित रूप से चलाने की अपील की. हालांकि, जैसे ही सरकार विपक्ष की इस मुख्य मांग पर राजी हुई, विपक्ष ने एक नया राजनीतिक पेंच फंसा दिया. अब विपक्ष ने सदन चलाने के लिए एक नई शर्त रख दी है. विपक्ष की मांग है कि छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और गृहमंत्री के बयान के साथ-साथ 'राम मंदिर चढ़ावा चोरी' के मुद्दे पर भी सरकार तुरंत चर्चा कराए. विपक्ष का कहना है कि सिर्फ आधी मांगें मानने से बात नहीं बनेगी.