मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद को लेकर देश के धार्मिक और सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है. चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने अयोध्या की तर्ज पर मथुरा में भी 6 दिसंबर को भव्य 'महाकार सेवा' करने का बड़ा ऐलान किया है. संतों ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा है कि राम जन्मभूमि के बाद अब कृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराने का समय आ गया है और सनातन धर्मी इसके लिए अपने प्राणों की आहुति देने तक को तैयार हैं. उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस कार सेवा के लिए आधिकारिक अनुमति भी मांगी है.
इस संकल्प के तहत, रविवार को चित्रगुप्त पीठ आश्रम में राजस्थान से मंगाए गए विशेष गुलाबी पत्थरों (शिलाओं) का वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-पूजन के साथ विशेष यज्ञ शुरू हुआ. स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने कहा कि जब तक मंदिर निर्माण शुरू नहीं हो जाता, तब तक यह यज्ञ अनवरत चलता रहेगा. हालांकि, संतों ने पूर्व में घोषित पैदल मार्च को सावन के महीने और कांवड़ यात्रा की व्यवस्था में व्यवधान न डालने के उद्देश्य से फिलहाल टाल दिया है. महिला संत निरंजनी अखाड़ा की साध्वी इंद्राणी नंद गिरी ने भी '6 दिसंबर' की ऐतिहासिक तारीख चुनने के पीछे संतों के एक गहरे रहस्यमयी संकेत की बात कही है.
इस बड़े आयोजन के बीच संतों ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर कार्यक्रम में बाधा डालने तथा संतों के साथ दुर्व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है. स्वामी सच्चिदानंद ने दावा किया कि शिला पूजन के लिए मंगाए गए पत्थरों को रात के अंधेरे में रहस्यमय तरीके से गायब कर दिया गया, जिसकी जांच के लिए वे सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाल रहे हैं. संतों ने उच्च न्यायालय से इस संवेदनशील मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कर जल्द से जल्द साक्ष्यों के आधार पर निर्णय सुनाने की अपील की है.