देश के लिए बेटा कुर्बान करने वाले परिवार को 22 साल बाद भी इंसाफ के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं. कहानी है लखनऊ के शौर्य चक्र विजेता शहीद असिस्टेंट कमांडेंट विवेक सक्सेना के परिवार की. शनिवार को सरोजनीनगर तहसील में लगे संपूर्ण समाधान दिवस में जब शहीद की 80 साल की मां सावित्री सक्सेना और बड़े भाई रंजीत सक्सेना पहुंचे तो उन्हें न्याय की जगह अपमान मिला. तहसीलदार ने मुंह पर कहा- जमीन नहीं मिलेगी. रंजीत सक्सेना का आरोप है कि तहसीलदार ने फाइल देखते ही कहा, "जमीन तो तुम्हें मिलेगी नहीं. जैसे सालों से भाग रहे हो, वैसे ही भागते रहो. अब ये फाइल नगर निगम जाएगी." इस बात से टूटी शहीद की 80 साल की मां ने कह दिया कि जब जमीन के लिए इतना अपमान सहना है तो सरकार उनके बेटे को मिला शौर्य चक्र, राष्ट्रपति पुलिस पदक और सम्मान राशि वापस ले ले.