53 साल बाद चिपको आंदोलन की वापसी, देहरादून में दी जा रही हजारों पेड़ों की बलि!

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  • प्रकाशित: जुलाई 16, 2026

1970 के दशक में रैणी गांव से शुरू हुए चिपको आंदोलन के 53 साल बाद उत्तराखंड में फिर से पेड़ बचाने का आंदोलन शुरू हो गया है. इस बार मुद्दा ऋषिकेश-देहरादून के बीच 6-लेन हाईवे है. 950 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के लिए शिवालिक क्षेत्र में लगभग 3500-4000 पेड़ काटे जा रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ये इलाका हाथियों का बसेरा है और 60-70 साल पुराने पेड़ काटे जा रहे हैं. उन्होंने हरेला पर्व के दौरान 'ब्लैक हरेला' मनाकर विरोध जताया. स्थानीय लोगों का सवाल है कि हाईवे पर जाम नहीं लगता, तो पेड़ क्यों काटे जा रहे हैं? उनका कहना है श्यामपुर फाटक जैसी जगहों पर ट्रैफिक ठीक किया जाए. सरकार और बीजेपी का तर्क है कि ये विकास के लिए जरूरी है और इससे स्थानीय लोगों को सुविधा मिलेगी. विडंबना ये है कि एक तरफ पेड़ काटे जा रहे हैं, दूसरी तरफ सरकार पौधारोपण के वीडियो भी शेयर कर रही है. सवाल फिर वही है- क्या चौड़ी सड़क ही विकास है या पेड़ भी विकास का हिस्सा हैं?