श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर कारसेवा: प्रशासन अलर्ट, लोगों को पुलिस का नोटिस, संतों ने कहा- 'पीछे नहीं हटेंगे'

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  • प्रकाशित: अगस्त 09, 2026

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद को लेकर संत समाज द्वारा 'कार सेवा' का बड़ा ऐलान किया गया है, जिसके बाद से क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और तनावपूर्ण माहौल महसूस किया जा रहा है. श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति अभियान के तहत देशभर के साधु-संतों और 13 अखाड़ों के महंतों का मथुरा आगमन शुरू हो चुका है. गोवर्धन स्थित श्री चित्रगुप्त पीठ आश्रम के प्रांगण से कार सेवा का शुभारंभ करने की तैयारियां की जा रही हैं. संतों का कहना है कि वे कोई मार्च (जुलूस) नहीं निकालेंगे, बल्कि आश्रम के भीतर केवल भव्य हवन-यज्ञ और चिंतन बैठक करेंगे. इस आयोजन को लेकर प्रशासन बेहद सतर्क है. पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए साध्वी ऋतंभरा, देवकीनंदन ठाकुर और स्वामी कृष्णानंद महाराज समेत कई प्रमुख संतों को नोटिस जारी कर कार्यक्रम में शामिल न होने की हिदायत दी है. इसके बावजूद संत पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.
इस कार सेवा की तुलना वर्ष 1990 के अयोध्या राम मंदिर आंदोलन से की जा रही है. मंदिर निर्माण के संकल्प के साथ राजस्थान के भरतपुर जिले की बंसी पहाड़पुर पहाड़ी से 50,000 घनफुट गुलाबी पत्थर मंगवाने का ऑर्डर दिया गया है, जिसमें से करीब 3,500 घनफुट पत्थर चित्रगुप्त पीठ पहुंच भी चुके हैं. यह वही पहाड़ी है, जहां से अयोध्या के राम मंदिर के लिए पत्थर भेजे गए थे. चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज ने कहा कि अगर न्यायालय और शासन के निर्णय में देरी हुई, तो संत समाज विवश होकर कदम उठाएगा. 
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी सौहार्द और बातचीत से मध्यस्थता करने का निर्देश दिया था. न्यायालय आगामी 12 अगस्त को इस मामले से जुड़ी याचिकाओं की समीक्षा करेगा, जबकि स्थानीय स्तर पर दोनों पक्षों के बीच सुलह वार्ता की समीक्षा 18 अगस्त को होनी है.

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