बंगाल चुनाव से पहले एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. AIMIM ने हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया है. यह फैसला उस कथित ऑडियो के सामने आने के बाद लिया गया, जिसमें बीजेपी से डील का दावा किया जा रहा है. अब AIMIM के बंगाल चुनाव अकेले लड़ने की चर्चा तेज हो गई है. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह फैसला AIMIM और हुमायूं कबीर दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि बंगाल में मुस्लिम वोट बैंक एकसमान नहीं है और स्थानीय मुद्दों की बड़ी भूमिका है.
मालदा‑मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता भी चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है.
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के पास ममता बनर्जी का नेतृत्व सबसे बड़ा मजबूत पक्ष है, जबकि बीजेपी 2021 के मुकाबले ज्यादा आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतर रही है और केंद्रीय नेतृत्व की सक्रिय मौजूदगी पर जोर दे रही है. कुल मिलाकर, छोटे‑छोटे राजनीतिक बदलाव इस बार बंगाल चुनाव में बड़ा असर डाल सकते हैं और मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा दिलचस्प होता नजर आ रहा है.