मेरे बच्चे कहां हैं... IVF से जन्मे जुड़वां बच्चों से मैच नहीं हुआ DNA, पीड़ित कपल के शॉकिंग खुलासे

देश की राजधानी दिल्ली से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मेडिकल सिस्टम और मानवता दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. दिल्ली के रहने वाले राहुल और मीनू राठौर ने माता-पिता बनने का सपना लेकर IVF तकनीक का सहारा लिया था. 9 महीने के इंतजार और तकलीफों के बाद जब बच्चों का जन्म हुआ, तो एक ऐसे सच का खुलासा हुआ जिसने इस परिवार की दुनिया उजाड़ दी. DNA रिपोर्ट में साबित हुआ कि जिन बच्चों को मीनू ने जन्म दिया है, वो उनके नहीं हैं!

परिवार का आरोप है कि SCI IVF सेंटर (ग्रेटर कैलाश) और मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके बच्चे बदल दिए. शिकायत करने पर अस्पताल ने फर्जी दस्तावेजों (Forged Documents) का सहारा लिया और परिवार पर ही 'डबल डोनर' लेने का झूठा आरोप लगा दिया.  न्याय पाने के लिए यह दंपति पुलिस, स्वास्थ्य मंत्रालय, ART विभाग और कोर्ट तक के चक्कर काट चुका है, लेकिन रसूखदार अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई अब तक नहीं हुई है. राठौर दंपति का मामला सामने आने के बाद देश-विदेश से कई अन्य लोग भी उन्हें फोन कर रहे हैं, जिन्हें इस IVF सेंटर के काम पर संदेह है.