नई 'रामायण' का ट्रेलर आते ही लोगों के बीच सिर्फ फिल्म ही नहीं, रामानंद सागर की 'रामायण' को लेकर भी पुरानी यादें ताजा हो गई हैं. हर कोई जानना चाहता है कि आखिर उस दौर में बिना ग्रीन स्क्रीन और विजुअल इफेक्ट्स के इतने भव्य दृश्य कैसे फिल्माए गए थे. अब इसी राज से पर्दा उठाने के लिए एक खास डॉक्यूमेंट्री लाई जा रही है, जो दर्शकों को उस धारावाहिक के पर्दे के पीछे की दुनिया दिखाएगी, जिसने कभी पूरे देश को रविवार की सुबह टीवी के सामने बैठने पर मजबूर कर दिया था.
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कैसे बनी थी टीवी की सबसे यादगार 'रामायण'?
इसमें बताया जाएगा कि उस दौर में, जब न ग्रीन स्क्रीन थी और न ही आज जैसी विजुअल इफेक्ट्स तकनीक, तब आखिर इतने भव्य दृश्य कैसे तैयार किए गए. सबसे खास बात यह है कि इसमें कई ऐसे किस्से भी होंगे, जो आज तक कभी सामने नहीं आए. रामानंद सागर के पोते शिव सागर इस डॉक्यूमेंट्री को बना रहे हैं. उनके मुताबिक, इसका मकसद सिर्फ पुराने दृश्य दिखाना नहीं, बल्कि यह बताना है कि सीमित साधनों के बावजूद पूरी टीम ने किस तरह ऐसा धारावाहिक बनाया, जो आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है.
डॉक्यूमेंट्री में कलाकारों, तकनीकी टीम और उनके परिवारों के इंटरव्यू शामिल किए गए हैं. कई ऐसे लोग अब इस दुनिया में नहीं हैं, इसलिए उनकी जगह उनके परिवार के सदस्यों ने उनसे जुड़ी यादें साझा की हैं.
सिर्फ कलाकार नहीं, उनके परिवारों की कहानी भी होगी
इस बार फोकस सिर्फ कैमरे के सामने काम करने वाले लोगों पर नहीं है. डॉक्यूमेंट्री में यह भी दिखाया जाएगा कि लंबे समय तक चलने वाली शूटिंग के दौरान कलाकारों और तकनीकी टीम के परिवारों ने क्या-क्या देखा और महसूस किया. खास तौर पर यूनिट के सदस्यों के घरवालों के अनुभवों को भी इसमें जगह दी गई है.
शिव सागर ने बताया कि उनके पास 'रामायण' की शूटिंग के दौरान की बड़ी संख्या में पुरानी तस्वीरें और निगेटिव सुरक्षित हैं. इन्हें अब हाई क्वालिटी में डिजिटल रूप दिया गया है. इतना ही नहीं, कुछ पर्दे के पीछे के दृश्यों को दोबारा दिखाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि दर्शक समझ सकें कि उस समय शूटिंग कैसे होती थी.
हर दिन स्टूडियो के बाहर उमड़ती थी हजारों लोगों की भीड़
शिव सागर ने अपने बचपन की यादें भी साझा कीं. उन्होंने बताया कि शूटिंग देखने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग उमरगाम पहुंच जाते थे. कई बार स्टूडियो के बाहर 30 हजार से 40 हजार लोगों की भीड़ जुट जाती थी. शाम होते ही रामानंद सागर और शो के कलाकार बाहर आकर लोगों से मुलाकात करते थे. उस दौर में 'रामायण' सिर्फ एक धारावाहिक नहीं, बल्कि लोगों की आस्था और उत्साह का हिस्सा बन चुकी थी.
नई 'रामायण' से पहले होगी रिलीज
शिव सागर के मुताबिक, डॉक्यूमेंट्री का इंटरव्यू वाला काम पूरा हो चुका है और अभी उसका पोस्ट प्रोडक्शन चल रहा है. योजना है कि इसे करीब दो महीने के भीतर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया जाए, ताकि दर्शक नितिश तिवारी की 'रामायण' सिनेमाघरों में आने से पहले रामानंद सागर की कालजयी सीरियल के मेकिंग सीक्रेट्स देख सकें.
'रामायण' के करोड़ों दर्शकों ने पर्दे पर भगवान राम, सीता, हनुमान और रावण को देखा, लेकिन कैमरे के पीछे की दुनिया आज तक बहुत कम लोगों ने देखी है. यह डॉक्यूमेंट्री उसी अनदेखी दुनिया के दरवाजे खोलेगी और बताएगी कि बिना आधुनिक तकनीक के भी जुनून, मेहनत और सोच के दम पर ऐसा इतिहास कैसे रचा गया, जिसे आज भी लोग उतने ही प्यार से याद करते हैं.
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