Uniform Civil Code: 2026 में गुजरात के यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पारित किए जाने के एक महीने से भी कम समय बाद अब मध्य प्रदेश भी उसी राह पर चुपचाप आगे बढ़ चुका है. दिल्ली से मिले संकेतों के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गृह विभाग को यूसीसी बिल का मसौदा तैयार करने के निर्देश दे दिए हैं. माना जा रहा है कि यह बिल अगले छह महीनों में पेश किया जा सकता है, जिससे राज्य में एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है.
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“किसी को एक से अधिक विवाह की अनुमति क्यों होनी चाहिए?"
तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा था, “किसी को एक से अधिक विवाह की अनुमति क्यों होनी चाहिए? एक ही देश में दो तरह के कानून क्यों चलें? कानून एक होना चाहिए.” उन्होंने उत्तराखंड और गुजरात की तर्ज पर एक समिति बनाने की भी बात कही थी. हालांकि, उस समय यह मुद्दा जल्द ही राजनीतिक असहजता में बदल गया था.
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विपक्ष ने यूसीसी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए थे
उसी मंच पर तत्कालीन पशुपालन मंत्री प्रेम सिंह पटेल भी मौजूद थे, जिन पर कांग्रेस ने कई विवाह करने के आरोप लगाए थे, यहां तक कि चार शादियों का दावा किया गया था. विपक्ष ने इस मुद्दे को उठाकर यूसीसी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए थे और नीति की बहस को राजनीतिक विवाद में बदल दिया था. चार साल बाद यह मुद्दा फिर से लौट आया है, इस बार सीएम मोहन के नेतृत्व में, लेकिन ज्यादा संगठित प्रशासनिक तैयारी के साथ.
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सबसे बड़ी चुनौती है MP की सामाजिक व जनसांख्यिक संरचना
सबसे बड़ी चुनौती राज्य की सामाजिक और जनसांख्यिक संरचना है. प्रेम सिंह पटेल आदिवासी समुदाय से आते हैं मध्य प्रदेश में करीब 21 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजाति की है, जो देश में सबसे अधिक है. साथ ही, 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हैं. ऐसे में आदिवासी कारक सिर्फ महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि निर्णायक है.
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सबसे बड़ी बाधा बन सकते हैं आदिवासी परंपराएं और रीति-रिवाज
सूत्रों के अनुसार, आदिवासी परंपराएं और रीति-रिवाज यूसीसी के मसौदे और उसके लागू होने में सबसे बड़ी बाधा बन सकते हैं. ‘दापा' प्रथा, जिसमें दूल्हे का परिवार वधू पक्ष को मूल्य देता है, ‘भगेली' या ‘लमसेना' विवाह, जिसमें युवक-युवती भागकर बाद में सामाजिक मान्यता प्राप्त करते हैं ऐसी परंपराएं आदिवासी समाज में गहराई से जमी हुई हैं। इन पर एक समान कानून लागू करना विरोध को जन्म दे सकता है.
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जल्द ही एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जा सकता है
जल्द ही एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जा सकता है, जो गुजरात और उत्तराखंड के यूसीसी कानूनों का अध्ययन करेगी कि कैसे उन्हें तैयार किया गया, कैसे लागू किया गया और उनकी संरचना क्या है।.सूत्रों के अनुसार, पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई, जिन्होंने इन दोनों राज्यों में समितियों की अध्यक्षता की थी, उन्हें ही मध्य प्रदेश में भी इस समिति की कमान सौंपी जा सकती है.
MP में अगर यूसीसी लागू होता है, तो इसके व्यापक प्रभाव होंगे
उच्चस्तरीय समिति में 5 से 6 सदस्य शामिल होंगे, जिनमें पूर्व हाईकोर्ट जज, रिटायर्ड आईएएस अधिकारी, कानूनी विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं. इस पर जल्द ही प्रशासनिक स्तर पर बैठक होने की संभावना है. अगर यूसीसी लागू होता है, तो इसके व्यापक प्रभाव होंगे. इस बदलाव का खाका पहले से तैयार है.
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फरवरी 2024 में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड
उत्तराखंड फरवरी 2024 में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना, जिसका कानून 27 जनवरी 2025 से लागू हुआ. इसमें विवाह और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण 30 दिनों के भीतर अनिवार्य किया गया है, और उल्लंघन पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है. इसके बाद मार्च 2026 में गुजरात ने भी यूसीसी लागू किया, जिसमें बेटा-बेटी को संपत्ति में समान अधिकार दिए गए, जबकि अनुसूचित जनजातियों को इससे बाहर रखा गया.
मध्य प्रदेश देश का तीसरा राज्य हो जाएगा, जहां यूसीसी लागू होगा
गोवा में पहले से ही पुर्तगाली सिविल कोड 1867 के तहत यूसीसी जैसी व्यवस्था लागू है. अब मध्य प्रदेश भी इस सूची में शामिल होने की तैयारी कर रहा है, लेकिन यहां मामला सिर्फ कानून का नहीं है यह गहराई से सामाजिक और राजनीतिक भी है. अगर ऐसा होता है, तो मध्य प्रदेश तीसरा राज्य होगा, जहां यूसीसी लागू होगा,
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