Social Media Use Side Effects: आज के डिजिटल दौर में हर किसी की जिंदगी का अहम हिस्सा सोशल मीडिया बन गया है. आंखें खोलते ही फोन को ढूंढना और इसको देखकर ही आगे के काम होते हैं. दिन की शुरुआत फोन से और रात का अंत भी फोन से ही होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी ये आदत कैसे आपकी मेंटल हेल्थ को और आपकी खुशी पर असर डाल रही हैं. हाल ही में एक रिपोर्ट के अनुसार सामने आया है कि कैसे जरूरत से ज्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल पर्सनल लाइफ पर असर डाल रहा है.
World Happiness Report 2026 के अनुसार, सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल लोगों की लाइफ सेटिस्फेक्शन को कम कर रहा है. इसका असर सबसे ज्यादा यंग जनरेशन पर पड़ रहा है. इस बात में कोई शक नहीं है कि सोशल मीडिया हमें दुनिया से जोड़ता है, लेकिन वहीं दूसरी तरफ ये हमें स्ट्रेस और कंपेरीसन की ओर ले जाता है. सवाल ये नहीं है कि Social Media गलत है या सही, बल्कि ये है कि हम इसका इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं और यह हमारी लाइफ को किस डायरेक्शन में ले जा रहा है.

1. सोशल मीडिया का कम इस्तेमाल करने वाले लोग ज्यादा खुश क्यों हैं?
World Happiness Report 2026 के रिपोर्ट के अनुसार जो लोग दिन में 1 घंटे से कम सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, वो ज्यादा खुश रहते हैं. वहीं, जो लोग 7 घंटे या उससे ज्यादा समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं उनमें वेलबीइंग में गिरावट देखी गई है. इस रिपोर्ट का साफ मतलब है कि हम जितना ज्यादा समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं, उतना ही हमारी रियल लाइफ सेटिक्फेशन कम होती जाती है.
2. क्या तुलना करना है असली वजह?
सोशल मीडिया पर हम जब दूसरों की परफेक्ट लाइफ देखते हैं- जैसे लग्जरी लाइफस्टाल, अचीवमेंट्स और उनकी लाइफ जीने का स्टाइल तो हम खुद को भी उसी जगह पर कंपेयर करने लगता हैं. लेकिन ये सब देखते हुए हम ये भूल जाते हैं कि ये सिर्फ एक हाइलाइज है पूरी असलियत नहीं. ये सिर्फ रील में दिख रहा है लेकिन रियल में क्या है ये नहीं पता होता है. किसी से तुलना करने पर-
- सेल्फ कॉफिडेंस कम होता है.
- स्ट्रेस बढ़ता है.
3. लड़कियों पर ज्यादा असर क्यों पड़ता है?

रिपोर्ट में पाया गया है कि लड़कियों पर सोशल मीडिया का असर सबसे ज्यादा पड़ता है, खासकर वेस्टर्न देशों में, जहां लाइफ सेटिस्फेक्शन में लगभग 1 प्वाइंट तक की गिरावट देखी गई है. अगर इसके कारणों की बात करें तो-
ये भी पढ़ें: यहां आओ, बस जाओ! दुनिया के वो देश जहां सरकार खुद देती है बसने का न्योता, कहीं पैसे तो कहीं फ्री सुविधाएं
- सोशल मीडिया वेलिडेशन.
- ऑनलाइन प्रेशर.
- अपीरियंस बेस्ड कांपटीशन.
4. हर तरह का सोशल मीडिया यूज हानिकारक नहीं होता
रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेट को आप दो तरीकों से इस्तेमाल कर सकते हैं-
एक्टिव इस्तेमाल (जैसे chatting, learning, content creation) इन सबका पॉजिटिव असर पड़ता है.
पैसिव इस्तेमाल (scrolling, gaming, timepass browsing) इसका नेगिटिव असर पड़ सकता है.
यानी यहां पर समस्या इसके इस्तेमाल करने में नहीं हैं, बल्कि आप इसका इस्तेमाल किस तरह से कर रहे हैं ये है.
5. लोग जानते हैं फिर भी क्यों नहीं छोड़ते?
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई लोग खुद मानते हैं कि सोशल मीडिया उनका समय बर्बाद करता है, फिर भी वे इसे छोड़ नहीं पाते. इसके पीछे की वजह है क्योंकि उन पर एक तरह के सोशल प्रेशर बन चुका है. इसके साथ ही इस प्रेशर ये भी है कि अगर इसका इस्तेमाल हर कोई कर रहा है तो हमको भी करना पड़ेगा.
6. क्या है इसका सॉल्यूशन?
सोशल मीडिया को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है, लेकिन आपको इसको बैलेंस करने की जरूरत है. जिसके आप कुछ बातों का ध्यान रख सकते हैं-
- रोज का स्क्रीन टाइम लिमिट सेट करें.
- सुबह उठते ही फोन न देखें.
- बिना मतलब स्क्रालिंग कम करें.
- हफ्ते में एक दिन डिजिटल डिटॉक्स रखें.
Gurudev Sri Sri Ravi Shankar on NDTV: Stress, Anxiety, से लेकर Relationship, Spirituality तक हर बात
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं