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90% लोग नहीं जानते! भारतीय घरों में बालकनी कपड़े सुखाने की जगह कैसे बन गई?

कपड़े सुखाने के लिए पहले घर के आंगन या छतों का इस्तेमाल किया था, लेकिन आज के समय में शहरों में तेजी से बढ़ती आबादी और फ्लैट कल्चर ने घरों के आकार को छोटा कर दिया और कपड़े सुखाने के लिए छत और आंगन की जगह बालकनी ने ले ली.

90% लोग नहीं जानते! भारतीय घरों में बालकनी कपड़े सुखाने की जगह कैसे बन गई?
कपड़े सुखाने की जगह कैसे बनी बालकनी? (Image Pixels)

Why People Hang Clothes In Balcony: आज अगर आप किसी भी इंडियन सिटी की ऊंची इमारतों या अपार्टमेंट्स को देखें, तो ज्यादातर बालकनियों में कपड़े सूखते नजर आ जाएंगे. ये इतना आम नजारा है कि शायद ही कोई इसके पीछे की वजह के बारे में सोचता हो. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि आखिर बालकनी ही कपड़े सुखाने की सबसे पसंदीदा जगह क्यों बन गई? इसकी वजह सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि भारत का मौसम, बदलती लाइफस्टाइल, लिमिटेड स्पेस और सालों से चली आ रही आदतें हैं.

धूप और हवा ने बना दिया सबसे बेहतर विकल्प-

भारत के ज्यादातर हिस्सों में सालभर अच्छी धूप और हवा मिलती है. यही वजह है कि कपड़े नेचुरली जल्दी सूख जाते हैं. तेज धूप न केवल कपड़ों की नमी दूर करती है, बल्कि UV रेज कई तरह के बैक्टीरिया और जर्म्स को भी कम करने में मदद करती हैं. ऐसे में लोग मशीन की बजाय धूप में कपड़े सुखाना ज्यादा पसंद करते हैं.

आंगन और छत की जगह अब बालकनी ने ले ली-

एक समय था जब ज्यादातर घरों में बड़े आंगन और खुली छतें हुआ करती थीं. कपड़े सुखाने के लिए यही जगहें इस्तेमाल होती थीं. लेकिन शहरों में तेजी से बढ़ती आबादी और फ्लैट कल्चर ने घरों के आकार को छोटा कर दिया. अब मल्टी स्टोरी में रहने वाले लोगों के पास बालकनी ही ऐसी जगह बचती है. जहां धूप और हवा दोनों आसानी से मिल जाती हैं. 

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खुली छत और आंगन की जगह बालकनी ने ले ली. Photo Credit: iStock

इलेक्ट्रिक ड्रायर अभी भी नहीं बन पाया पहली पसंद

वेस्टर्न कंट्री में कपड़े सुखाने के लिए ड्रायर का इस्तेमाल आम है. लेकिन इंडिया में स्थिति अलग है. ड्रायर मशीनें कंपेरेटिवली महंगी होती हैं और इनमें बिजली की खपत भी काफी ज्यादा होती है.

छोटी बालकनी के लिए स्मार्ट सॉल्यूशन-

समय के साथ बालकनी का इस्तेमाल भी स्मार्ट हो गया है. अब बाजार में सीलिंग-माउंटेड क्लॉथ ड्रायर्स, फोल्डेबल वॉल-माउंटेड हैंगर्स और पुली सिस्टम वाले ड्राइंग रैक आसानी से मिल जाते हैं. इनकी खासियत ये है कि इस्तेमाल के बाद इन्हें मोड़कर दीवार या छत से सटा दिया जाता है. जिससे जगह भी बचती है और बालकनी साफ-सुथरी नजर आती है.

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