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द‍िल्‍ली में क्‍या देखें? इस जंगल के बीचों-बीच है दिल्‍ली का असली लाल किला! राजस्‍थान छोड़ो यहां घूमों...

Lal Kot Red Fort: अगली बार जब आप घूमने का प्लान बनाएं, तो राजस्थान के किलों के बजाय महरौली के इस छिपे हुए खजाने को जरूर एक्सप्लोर करें. यहां आपको इतिहास, प्रकृति और शांति, तीनों का अनोखा अनुभव मिलेगा.

द‍िल्‍ली में क्‍या देखें? इस जंगल के बीचों-बीच है दिल्‍ली का असली लाल किला! राजस्‍थान छोड़ो यहां घूमों...
Lal Kot Red Fort: दिल्ली सिर्फ मॉडर्न सिटी नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी कहानियों का खजाना है. (AI Image)

Delhi Travel Places: जब भी हम लाल किला का नाम सुनते हैं, तो दिमाग में तुरंत मुगलों द्वारा बनाया गया भव्य किला सामने आ जाता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि दिल्ली का असली और पहला लाल किला इससे भी सदियों पुराना है? दक्षिण दिल्ली के महरौली इलाके में घने पेड़ों और शांत वातावरण के बीच छिपा है लाल कोट, जिसे 11वीं सदी में तोमर राजपूतों ने बनवाया था. यह सिर्फ एक किला नहीं, बल्कि दिल्ली के जन्म की कहानी है. यहां की टूटी दीवारें, पुराना स्ट्रक्चर और खामोशी आज भी हजारों साल पुरानी सभ्यता की गवाही देती हैं. अगर आप इतिहास को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो यह जगह आपके लिए किसी खजाने से कम नहीं.

दिल्ली का पहला किला - लाल कोट की कहानी | Delhi's First Fort - The Story of Lal Kot

दिल्ली का इतिहास सिर्फ मुगल काल से शुरू नहीं होता, बल्कि उससे कई सदियों पहले ही इसकी नींव रखी जा चुकी थी. 11वीं सदी में तोमर राजा अनंगपाल द्वितीय ने लाल कोट का निर्माण करवाया, जो उस समय का सबसे मजबूत किला माना जाता था.

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करीब 3.5 किलोमीटर तक फैला यह किला बेहद विशाल था. इसकी दीवारें इतनी मोटी और ऊंची थीं कि दुश्मनों के लिए इसे तोड़ पाना लगभग नामुमकिन था. आज भी इन दीवारों के अवशेष देखकर इसकी भव्यता का अंदाजा लगाया जा सकता है. बाद में लाल कोट का विस्तार करते हुए किला राय पिथौरा का निर्माण किया गया. यह किला लाल कोट को तीन दिशाओं से घेरता था और इसे और भी मजबूत बनाता था. दिलचस्प बात यह है कि आज का मशहूर कुतुब मीनार परिसर भी कभी इसी किले का हिस्सा हुआ करता था.

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Photo Credit: AI Image

विशाल तलाब और कमल के आकार का टैंक

लाल कोट के भीतर एक बेहद खास जल संरचना भी थी, अनंगताल. यह एक विशाल तालाब था, जिससे किले के अंदर पानी की सप्लाई होती थी. इतना ही नहीं, यहां एक अष्टकोणीय कमल के आकार का टैंक भी बनाया गया था, जो शाही परिवार के उपयोग के लिए था. यह दिखाता है कि उस समय भी वाटर मैनेजमेंट कितना एडवांस था.

यहां क्यों घूमने जाएं?

अगर आप भीड़-भाड़ से दूर कुछ अलग अनुभव करना चाहते हैं, तो लाल कोट और किला राय पिथौरा आपके लिए परफेक्ट जगह है:

  • प्रकृति और इतिहास का अनोखा संगम.
  • फोटोग्राफी के लिए शानदार लोकेशन.
  • शांत वातावरण, जहां आप सुकून महसूस करेंगे.
  • दिल्ली के असली इतिहास को करीब से जानने का मौका.

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यहां क्या-क्या देखें?

1. कुतुब मीनार परिसर: UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट, कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और प्राचीन खंभे, यहां आपको हिंदू-जैन मंदिरों के अवशेष भी देखने को मिलेंगे.

2. बलबन का मकबरा: भारत का पहला असली मेहराब (true arch) यहीं देखने को मिलता है, शांत जंगल के बीच स्थित है, बहुत कम भीड़.

3. जमाली कमाली मस्जिद और मकबरा: यहां आपको सुंदर नक्काशी और आर्किटेक्चर देखने को मिलेगा, फोटोग्राफी के लिए शानदार जगह.

4. चौमुखा गेट: किले का पुराना प्रवेश द्वार यहां से आपको किले की असली स्ट्रक्चर का अंदाजा मिलेगा.

5. अनंग ताल: 11वीं सदी का जलाशय, पुराने समय में वाटर स्टोर करने का शानदार उदाहरण देखने को मिलेगा.

6. अधम खान का मकबरा: मोटी दीवारों वाला विशाल मकबरा, इसे भूल-भुलैया भी कहा जाता है.

7. महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क: यहां आपको पूरा इतिहास एक ही जगह मिल जाएगा, सुबह या शाम घूमने के लिए बेस्ट.

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घूमने का बेस्ट प्लान:

  • सुबह जल्दी पहुंचें: मौसम सुहावना और भीड़ कम मिलेगी.
  • आरामदायक जूते पहनें: थोड़ा वॉक करना पड़ता है.

दिल्ली सिर्फ मॉडर्न सिटी नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी कहानियों का खजाना है. लाल कोट और किला राय पिथौरा जैसे ऐतिहासिक स्थल हमें यह समझाते हैं कि असली दिल्ली कैसी थी और कैसे समय के साथ बदलती गई. तो अगली बार जब आप घूमने का प्लान बनाएं, तो राजस्थान के किलों के बजाय महरौली के इस छिपे हुए खजाने को जरूर एक्सप्लोर करें. यहां आपको इतिहास, प्रकृति और शांति, तीनों का अनोखा अनुभव मिलेगा.

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