विज्ञापन

उपवास सिर्फ खाना छोड़ना नहीं: शरीर और मन को रीसेट करने का आसान तरीका

उपवास सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं। जानें कैसे सही तरीके से किया गया उपवास शरीर, मन और मानसिक शांति के लिए फायदेमंद हो सकता है.

उपवास सिर्फ खाना छोड़ना नहीं: शरीर और मन को रीसेट करने का आसान तरीका

उपवास को अक्सर सिर्फ खाना न खाने से जोड़ दिया जाता है, लेकिन असल में यह शरीर और मन—दोनों को थोड़ी राहत देने का अभ्यास है. जब हम कुछ समय के लिए लगातार खाते रहने और भागदौड़ भरी दिनचर्या से रुकते हैं, तो हमें अपने भीतर झांकने का मौका मिलता है. समझदारी और संतुलन के साथ किया गया उपवास स्वास्थ्य और मानसिक शांति- दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है.

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में हमारा दिमाग हर समय सूचनाओं, शोर और विचारों से भरा रहता है. ऐसे में उपवास और ध्यान मिलकर हमें थोड़ा ठहरना सिखाते हैं- और यही इस अभ्यास की असली ताकत है.

मन बेचैन क्यों रहता है? इसका सीधा कारण

हम जो देखते, सुनते और सोचते हैं, वही धीरे‑धीरे हमारी मानसिक स्थिति बनाता है. लगातार नकारात्मक खबरें, तुलना और शिकायतें आसक्ति और विरोध को जन्म देती हैं. यही दोनों मानसिक तनाव और अंदरूनी बेचैनी की बड़ी वजह बनते हैं.

जब मन हर समय बाहरी बातों में उलझा रहता है, तो बेचैनी बढ़ती जाती है. ध्यान का उद्देश्य इसी उलझन को कम करना है. जैसे‑जैसे हम भीतर की ओर ध्यान केंद्रित करते हैं, विचारों की पकड़ ढीली होने लगती है और मन ज़्यादा साफ़ महसूस करता है.

यही भावनात्मक शुद्धता है- जब मन शिकायत छोड़कर स्वीकार और संवेदनशीलता की ओर बढ़ता है, तो मानसिक बोझ अपने आप हल्का हो जाता है.

यही उपवास का असली उद्देश्य है-  

स्वस्थ शरीर, शांत मन और यह विश्वास कि हम खुद की बेहतर देखभाल कर सकते हैं.

श्री श्री रवि शंकर

उपवास: शरीर को कष्ट देना नहीं, संतुलन देना

उपवास का मतलब खुद को भूखा रखना नहीं है, बल्कि शरीर को कुछ समय का आराम देना है.
कुछ लोग फल या हल्का भोजन लेते हैं, कुछ सिर्फ पानी पीते हैं- यह पूरी तरह व्यक्ति की सेहत और क्षमता पर निर्भर करता है.

याद रखें:

  • उपवास कभी ज़बरदस्ती नहीं होना चाहिए
  • ज़्यादा कमजोरी या चक्कर आएं, तो तरीका बदलना ज़रूरी है
  • उपवास का उद्देश्य शरीर को सुनना है, उसे थकाना नहीं

जब पाचन को थोड़ी देर की राहत मिलती है, तो शरीर अपनी ऊर्जा मरम्मत और संतुलन में लगाने लगता है.

Also Read: करियर में सफल कैसे हों, कर‍ियर चुनने से पहले जान लें सफलता के ये मूल मंत्र : गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

ध्यान और मौन: मन की सफाई

ध्यान करना-  गहरी सांसों के साथ कुछ समय शांति से बैठना- मन के लिए वैसा ही है जैसे शरीर के लिए स्नान.
ध्यान के दौरान कोई शब्द, कोई मंत्र या सिर्फ सांस पर ध्यान-  तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन उद्देश्य एक है: मन की रफ्तार को धीमा करना.

मौन भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है. कम बोलने से हमें भीतर की आवाज़ सुनने का मौका मिलता है. यहीं हमें अपनी थकान, बेचैनी और उलझन के असली कारण समझ आने लगते हैं.

Latest and Breaking News on NDTV

चेतन जीवन: स्वास्थ्य का असली सूत्र

अच्छा स्वास्थ्य सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं है. हमारी भूख, नींद, तनाव और खुशी-  सब एक‑दूसरे से जुड़े हैं. जब हम अपने अनुभवों को ध्यान से देखने लगते हैं, तो समझ आने लगता है कि जागरूक रहना ही सबसे बड़ा स्वास्थ्य‑सूत्र है.

जहां जागरूकता है, वहीं संतुलन है.

Also Read: पहले भीतर की होलिका को जलाओ और फि‍र जानों होली क्यों मनाई जाती है : गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

छोटी आदतें, बड़ा फर्क

एक बेहतर जीवनशैली किसी सख्त नियम से नहीं, बल्कि दो आसान बदलावों से शुरू होती है:

  • शिकायत कम करना
  • जो ठीक है, उसके लिए कृतज्ञ होना

इन दो आदतों से मन का तनाव अपने आप कम होने लगता है.

उपवास: बाहर से नहीं, भीतर की ओर

उपवास और ध्यान हमें कुछ पाने से ज़्यादा कुछ छोड़ना सिखाते हैं- बेकार की चिंता, अनावश्यक तुलना और लगातार दौड़.
जब हम इनसे मुक्त होते हैं, तभी मन हल्का और साफ़ महसूस करता है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com