सोशल मीडिया आजकल हर किसी की लाइफ का जरूरी हिस्सा बन गया है. लगभग हर माता-पिता अपने बच्चों की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं. बच्चे की पहली मुस्कान, पहला कदम, पहला बर्थडे, स्कूल का पहला दिन हो या कोई मजेदार पल, लोग खुशी-खुशी इंटरनेट पर पोस्ट कर देते हैं. लेकिन क्या ऐसा करना सही है? इसे लेकर फेमस पेरेंटिंग कोच रिद्धि देवराह ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है. आइए जानते हैं इस पोस्ट में एक्सपर्ट क्या कहती हैं-
क्या बच्चों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करना सही है?
रिद्धि देवराह के अनुसार, शुरुआत अक्सर सिर्फ एक फोटो या छोटे से वीडियो से होती है. उस पोस्ट पर लोगों के लाइक और अच्छे कमेंट आते हैं. इससे माता-पिता को खुशी मिलती है और फिर वे बच्चों की और भी फोटो और वीडियो पोस्ट करने लगते हैं. धीरे-धीरे बच्चा सोशल मीडिया का एक बड़ा हिस्सा बन जाता है. अब, पहली नजर में तो ये सब नॉर्मल लगता है, लेकिन इसका असर बच्चे पर भी पड़ सकता है.
बच्चे पर कैसे पड़ता है असर?पेरेंटिंग कोच बताती हैं, बच्चे बहुत जल्दी नई चीजें सीखते हैं. अगर उन्हें बार-बार कैमरे के सामने लाया जाता है, तो उनके मन में यह बात बैठ सकती है कि जब वे क्यूट दिखते हैं, मजेदार बातें करते हैं या लोगों का मनोरंजन करते हैं, तभी उन्हें ज्यादा प्यार, तारीफ और ध्यान मिलता है. ऐसे में धीरे-धीरे वे अपनी खुशी के लिए नहीं, बल्कि कैमरे और लोगों के रिएक्शन के लिए काम करने लगते हैं. यह आदत आगे चलकर उनके कॉन्फिडेंस और सोच पर असर डाल सकती है.
आसान भाषा में समझें तो अक्सर ऐसा होता है कि बच्चा खेल रहा होता है या अपनी मस्ती में कुछ कर रहा होता है. तभी माता-पिता कहते हैं, 'एक बार फिर से ऐसा करो, वीडियो बनानी है' या 'कैमरे की तरफ देखकर बोलो.' धीरे-धीरे हर छोटी-बड़ी बात रिकॉर्ड होने लगती है और ऐसा होने पर बच्चा उस पल का मजा लेने की बजाय बस कैमरे के लिए वो काम करने लगता है.
आगे चलकर बच्चा हो सकता है शर्मिंदारिद्धि देवराह का कहना है कि जो वीडियो या फोटो आज माता-पिता को बहुत मजेदार लग रही है, वही बच्चा बड़ा होने पर देखकर असहज या शर्मिंदा भी महसूस कर सकता है.
फिर क्या करें?पेरेंटिंग कोच के मुताबिक, सोशल मीडिया पर डाली गई चीजें लंबे समय तक इंटरनेट पर मौजूद रह सकती हैं. इसलिए किसी भी फोटो या वीडियो को पोस्ट करने से पहले यह जरूर सोचें कि क्या भविष्य में आपका बच्चा इसके साथ सहज महसूस करेगा. खुद से सवाल करें कि 'जब मेरा बच्चा बड़ा होगा, तो वह खुद की ये फोटो या वीडियो देखकर क्या सोचेगा?' या वो खुद को इस तरह देखना पसंद करेगा?
अगर इस सवाल का जवाब पूरे भरोसे के साथ 'हां' नहीं है, तो उस पोस्ट को शेयर करने से पहले दोबारा जरूर सोचें. हर खूबसूरत याद को इंटरनेट पर डालना जरूरी नहीं होता है.
बच्चे की प्राइवेसी का रखें ध्यानहर बच्चे को अपनी निजी जिंदगी का अधिकार है. वह अभी इतना बड़ा नहीं होता कि खुद तय कर सके कि उसकी कौन-सी फोटो या वीडियो दुनिया के सामने जाए और कौन-सी नहीं. ऐसे में यह जिम्मेदारी माता-पिता की होती है कि वे बच्चे की प्राइवेसी का ध्यान रखें. बच्चों को सबसे ज्यादा जरूरत प्यार, सुरक्षित माहौल और खुशहाल बचपन की होती है, न कि सोशल मीडिया पर पहचान बनाने की. हर पल को कैमरे में कैद करने की बजाय उसे खुलकर जीना भी उतना ही जरूरी है.
इसलिए अगली बार जब आप अपने बच्चे की कोई फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने जाएं, तो एक मिनट रुककर जरूर सोचें. यह छोटा-सा फैसला आपके बच्चे की प्राइवेसी, आत्मसम्मान और भविष्य- तीनों के लिए बेहतर साबित हो सकता है.
अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.
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