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जब बच्चे बन जाएं माता-पिता! क्या है रिवर्स पेरेंटिंग, जिसका चीन में तेजी से बढ़ रहा है ट्रेंड?

Reverse Parenting In China: रिवर्स पेरेंटिंग आज की बदलती तस्वीर को दर्शाती है. यह दिखाती है कि आज के बच्चे पहले से ज्यादा समझदार और जागरूक हैं. लेकिन, साथ ही यह भी जरूरी है कि परिवार में संतुलन बना रहे.

जब बच्चे बन जाएं माता-पिता! क्या है रिवर्स पेरेंटिंग, जिसका चीन में तेजी से बढ़ रहा है ट्रेंड?
रिवर्स पेरेंटिंग पूरी तरह गलत भी नहीं है और पूरी तरह सही भी नहीं.

Reverse Parenting: आज के समय में ट्रेडिशनल फैमिली सिस्टम तेजी से बदल रही है. पहले जहां माता-पिता बच्चों को संभालते थे, उनकी जरूरतों का ध्यान रखते थे और जीवन की दिशा तय करते थे, वहीं अब कई जगहों पर तस्वीर उलटी नजर आ रही है. खासकर चीन में एक नया शब्द चर्चा में है रिवर्स पेरेंटिंग. यह ट्रेंड सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और परिवार, जिम्मेदारी तथा रिश्तों की नई परिभाषा गढ़ रहा है. सवाल यह है कि आखिर रिवर्स पेरेंटिंग है क्या? और इसमें माता-पिता व बच्चे किस तरह का व्यवहार करने लगते हैं?

क्या है रिवर्स पेरेंटिंग? (What Is Reverse Parenting?)

रिवर्स पेरेंटिंग का मतलब है जब बच्चे अपने माता-पिता की भावनात्मक, मानसिक या कभी-कभी आर्थिक जिम्मेदारी उठाने लगते हैं. यानी जिस भूमिका में सामान्यत: माता-पिता होते हैं, वही भूमिका बच्चे निभाने लगते हैं. इसमें बच्चे माता-पिता को समझाते हैं, उन्हें भावनात्मक सहारा देते हैं, उनके फैसलों में मार्गदर्शन करते हैं और कई बार उनके तनाव को भी संभालते हैं.

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चीन में क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड?

चीन में तेज रफ्तार जीवन, काम का दबाव और सामाजिक बदलावों के कारण कई माता-पिता मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं.

1. काम और प्रतिस्पर्धा का दबाव

चीन में नौकरी और सफलता की होड़ बहुत ज्यादा है. माता-पिता लंबे समय तक काम करते हैं, जिससे वे भावनात्मक रूप से थक जाते हैं. ऐसे में बच्चे उन्हें भावनात्मक सहारा देने लगते हैं.

2. वन चाइल्ड पॉलिसी का असर

चीन की वन चाइल्ड पॉलिसी के कारण कई परिवारों में सिर्फ एक ही बच्चा है. ऐसे में वह बच्चा ही माता-पिता की उम्मीदों और जिम्मेदारियों का केंद्र बन जाता है. धीरे-धीरे वह परिवार में भावनात्मक स्तंभ की भूमिका निभाने लगता है.

3. सोशल मीडिया और जागरूकता

नई पीढ़ी मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा जागरूक है. बच्चे अपने माता-पिता को काउंसलिंग, रिलैक्सेशन या बेहतर लाइफस्टाइल की सलाह देने लगे हैं.

माता-पिता का बिहेवियर कैसे बदलता है?

रिवर्स पेरेंटिंग में कई बार माता-पिता बच्चों से सलाह लेने लगते हैं. चाहे वह करियर से जुड़ा हो या निजी जीवन से. वे अपने तनाव और परेशानियां बच्चों से शेयर करते हैं. निर्णय लेने में बच्चों पर निर्भर होने लगते हैं. भावनात्मक रूप से कमजोर या सेंसिटिव हो जाते हैं. कुछ मामलों में माता-पिता बच्चों से उम्मीद करते हैं कि वे उन्हें समझें, उनका ख्याल रखें और उनका मेंटल सपोर्ट सिस्टम बनें.

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Photo Credit: चीन की वन चाइल्ड पॉलिसी के कारण कई परिवारों में सिर्फ एक ही बच्चा है. Freepik

क्या यह सही है या गलत?

रिवर्स पेरेंटिंग पूरी तरह गलत भी नहीं है और पूरी तरह सही भी नहीं.

सकारात्मक पहलू:

  • परिवार में खुलापन और संवाद बढ़ता है.
  • बच्चे जिम्मेदार और संवेदनशील बनते हैं.
  • माता-पिता और बच्चों के बीच दोस्ताना रिश्ता बनता है.

नकारात्मक पहलू:

  • बच्चे मानसिक दबाव महसूस कर सकते हैं.
  • बचपन की मासूमियत जल्दी खत्म हो सकती है.
  • भावनात्मक असंतुलन पैदा हो सकता है.

संतुलन कैसे बनाए रखें?

माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों से खुलकर बात करें, लेकिन उन्हें अपनी भावनात्मक जिम्मेदारी पूरी तरह बच्चों पर न डालें.

  • जरूरत पड़े तो प्रोफेशनल काउंसलिंग लें.
  • बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार जिम्मेदारी दें.
  • परिवार में सहयोग का माहौल बनाएं, लेकिन भूमिकाएं साफ रखें.

रिवर्स पेरेंटिंग आज की बदलती तस्वीर को दर्शाती है. यह दिखाती है कि आज के बच्चे पहले से ज्यादा समझदार और जागरूक हैं. लेकिन, साथ ही यह भी जरूरी है कि परिवार में संतुलन बना रहे.

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